अमित शाह का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- वंदे मातरम् के टुकड़े करने का फैसला देश की भावना के खिलाफ

वंदे मातरम् को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के उस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें पार्टी ने अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद गाने का निर्णय दोहराया है। अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत को इस तरह सीमित करना देश की भावनाओं और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के साथ न्याय नहीं करता। उनके बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान लाखों लोगों ने इस गीत से प्रेरणा लेकर देश के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिया। ऐसे में राष्ट्रीय गीत के केवल दो छंद गाने का फैसला लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला है।
गृह मंत्री ने कांग्रेस के ऐतिहासिक रुख का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1937 में पार्टी ने जिस तरह का निर्णय लिया था, उसे अब दोबारा सामने लाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् को पूर्ण रूप से स्वीकार करने के बजाय उसे सीमित करने का रास्ता चुना है। अमित शाह ने कहा कि देश को यह याद रखना चाहिए कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक रहा है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वंदे मातरम् के महत्व को समझें और इसे देश की एकता, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत की आत्मा और स्वाभिमान का प्रतिनिधित्व करता है और इसे किसी भी तरह से विभाजित करने की सोच उचित नहीं है।
दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कोई नया निर्णय नहीं है। पार्टी का कहना है कि वह लंबे समय से अपने ऐतिहासिक निर्णय का पालन करती आ रही है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो छंद ही गाए जाने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है और यही रुख पार्टी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है।
वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुई इस नई बहस ने राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर वैचारिक टकराव को सामने ला दिया है। भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान का मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे अपने ऐतिहासिक निर्णय और परंपरा से जुड़ा विषय बता रही है। दोनों दल अपने-अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे पर लगातार बयान दे रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वंदे मातरम् का मुद्दा आने वाले समय में भी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है। संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस विषय पर बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। राष्ट्रीय गीत, स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और संवैधानिक परंपराओं को लेकर चल रही यह बहस अब राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बन चुकी है और इसका असर आने वाले दिनों में भी देखने को मिल सकता है।
