महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों की मराठी परीक्षा शुरू, RTO का बड़ा अभियान, भाषा नहीं आने पर मिला एक महीने का नोटिस

महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जुड़े ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया गया है। मुंबई के दादर ईस्ट क्षेत्र में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ ने ऑटो और टैक्सी चालकों की मराठी बोलने और समझने की क्षमता की जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों से स्थानीय भाषा में संवाद करने में चालकों को कोई परेशानी न हो और राज्य के नियमों का पालन किया जाए।
अभियान के दौरान परिवहन अधिकारियों की टीम विभिन्न स्थानों पर ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच कर रही है। चालकों से मराठी में सामान्य बातचीत, रोजमर्रा के सवालों के जवाब और यात्रियों से जुड़ी सामान्य परिस्थितियों में संवाद करने की क्षमता देखी जा रही है। जिन चालकों को मराठी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं मिला, उन्हें भाषा सीखने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। अधिकारियों ने ऐसे चालकों को नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि के भीतर मराठी सीखने और दोबारा जांच के लिए तैयार रहने को कहा है।
यह अभियान खासतौर पर उन चालकों पर केंद्रित है जो लंबे समय से मुंबई में परिवहन सेवा दे रहे हैं लेकिन अब तक मराठी भाषा का सामान्य ज्ञान भी नहीं रखते। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चालकों का मराठी समझना और बोलना जरूरी माना गया है। इससे यात्रियों और चालकों के बीच संवाद आसान होगा और गलतफहमियों की संभावना भी कम होगी।
दादर ईस्ट में शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान कई चालकों से मौके पर ही बातचीत की गई। कुछ चालकों ने मराठी में सहज जवाब दिए, जबकि कई चालक भाषा बोलने में असहज दिखाई दिए। जिन लोगों को भाषा नहीं आती थी, उन्हें तत्काल दंडित करने के बजाय पहले सीखने का अवसर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं बल्कि नियमों के पालन और बेहतर सार्वजनिक सेवा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
कई ऑटो और टैक्सी चालकों ने इस अभियान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ का कहना है कि वे वर्षों से मुंबई में काम कर रहे हैं और अब मराठी सीखने की कोशिश करेंगे। वहीं कुछ चालकों का मानना है कि वे अलग-अलग राज्यों से आकर रोजी-रोटी कमाने के लिए मुंबई में काम करते हैं, इसलिए उन्हें भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय और सहयोग मिलना चाहिए। कई चालकों ने यह भी कहा कि वे यात्रियों से हिंदी और अन्य भाषाओं में बातचीत कर लेते हैं, लेकिन अब मराठी सीखना भी जरूरी हो गया है।
परिवहन विभाग का कहना है कि एक महीने की अवधि पूरी होने के बाद दोबारा जांच की जाएगी। यदि कोई चालक निर्धारित समय के बाद भी मराठी का बुनियादी ज्ञान नहीं दिखा पाता है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राथमिकता पहले चालकों को भाषा सीखने का मौका देना है।
मुंबई जैसे महानगर में हर दिन लाखों लोग ऑटो और टैक्सी से सफर करते हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा का ज्ञान यात्रियों की सुविधा, मार्गदर्शन और आपात स्थिति में बेहतर संवाद के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरटीओ का यह अभियान आने वाले दिनों में शहर के अन्य इलाकों तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस वजह से मराठी भाषा को लेकर शुरू हुई यह पहल पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोगों की नजरें अब इस अभियान के अगले चरण पर टिकी हैं।
