बिहार में अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, काम पर नहीं लौटे तो निलंबन की चेतावनी

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बिहार में अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों की जारी हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर हड़ताली अधिकारी और कर्मचारी जल्द ही अपने काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले पर उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकारी कामकाज को लंबे समय तक बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर हड़ताल पर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 31 मार्च तक भूमि और राजस्व से जुड़े लगभग 46 लाख आवेदनों के निष्पादन का लक्ष्य तय किया था। इन आवेदनों में जमीन से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा किया जाना था, जिनमें दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, भूमि विवाद और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं शामिल हैं। लेकिन अंचलाधिकारियों के हड़ताल पर जाने और उसके बाद राजस्व कर्मचारियों के भी काम बंद कर देने से इन मामलों के निपटारे की प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।

उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में फाइलें लंबित हो गई हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई लोग अपने जमीन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता हमेशा यह रही है कि जनता को समय पर सरकारी सेवाएं मिलें और उनके काम बिना किसी बाधा के पूरे हों। ऐसे में जब सरकारी अधिकारी और कर्मचारी ही काम बंद कर देते हैं तो इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है।

डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि हड़ताल के पीछे कुछ संदिग्ध परिस्थितियां भी दिखाई दे रही हैं। उनका कहना था कि पहले अंचलाधिकारी हड़ताल पर गए और उसके तुरंत बाद राजस्व कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया। ऐसे में यह केवल संयोग नहीं लगता और इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस बात की भी जांच कर सकती है कि कहीं इस पूरी स्थिति के पीछे भू-माफियाओं की भूमिका तो नहीं है।

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार जमीन से जुड़े मामलों को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। सरकार की कोशिश है कि लोगों को अपने जमीन से जुड़े कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें और प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो सकें। लेकिन वर्तमान हड़ताल के कारण कई जरूरी फाइलें लंबित हो गई हैं और इससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।

सरकार ने हड़ताल कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील भी की है कि वे जल्द से जल्द अपने काम पर लौटें और लंबित मामलों के समाधान में सहयोग करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है तो प्रशासनिक स्तर पर सख्त निर्णय लिए जा सकते हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार की चेतावनी के बाद हड़ताल कर रहे अधिकारी और कर्मचारी क्या फैसला लेते हैं और राजस्व विभाग का कामकाज कब तक सामान्य हो पाता है।

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