कोचिंग संस्थानों के लिए बिहार में सख्त नियम, पंजीकरण से लेकर फायर एनओसी तक अनिवार्य

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राज्य में कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिहार पुलिस ने नई नियमावली जारी की है। इन निर्देशों के तहत अब सभी कोचिंग संस्थानों के लिए अनिवार्य पंजीकरण, कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन और अग्निशमन विभाग से फायर एनओसी लेना जरूरी कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से छात्रों को सुरक्षित और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा तथा संस्थानों में सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जा सकेगा।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार हर कोचिंग संस्थान को अपना पंजीकरण कराना होगा और उसकी पंजीकरण संख्या को रिसेप्शन पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। संस्थानों को सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए समय-समय पर सिक्योरिटी ऑडिट कराने की भी सलाह दी गई है।

छात्रों की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अग्नि सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। अब प्रत्येक संस्थान को अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। परिसर में आग, भूकंप या बाढ़ जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने होंगे और स्टाफ व छात्रों के लिए नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करनी होगी। आपातकालीन निकास, प्राथमिक उपचार की सुविधा और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भी अनिवार्य बनाया गया है।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर दिया गया है। संस्थानों को करियर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था करनी होगी। यदि कोई छात्र असामान्य व्यवहार या अवसाद के लक्षणों से प्रभावित पाया जाता है तो तुरंत उसके अभिभावकों को सूचित करना आवश्यक होगा। साथ ही नियमित कक्षाओं से अनुपस्थित रहने वाले छात्रों और उनके मॉक टेस्ट प्रदर्शन की जानकारी भी अभिभावकों को मैसेज या नोटिफिकेशन के माध्यम से देनी होगी।

छात्राओं की सुरक्षा के लिए संस्थानों को आपातकालीन सेवाओं और महिला सुरक्षा सुविधाओं के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। रिसेप्शन पर स्थानीय थाना, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और आपातकालीन नंबर से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। यदि कोई संस्थान परिवहन सुविधा प्रदान करता है, तो वाहन चालक और सहायक का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य होगा, ताकि छात्रों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।

नई गाइडलाइन्स को बिहार में कोचिंग संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षा, अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य को भी समान महत्व देना है। सरकार का मानना है कि इन नियमों से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और शैक्षणिक माहौल अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार बनेगा।

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