बिहार में महंगी संपत्ति की खरीद-बिक्री पर सख्ती, 10 लाख से ऊपर के निबंधन में पैन अनिवार्य
बिहार में 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती और बढ़ा दी है। जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्ति के निबंधन के दौरान अब खरीदार और विक्रेता दोनों का पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही पैन का सत्यापन भी अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। इस संबंध में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी जिला अवर निबंधकों और अवर निबंधकों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।
उप निबंधक महानिरीक्षक ने बताया कि यह कदम आयकर निदेशक पटना से प्राप्त पत्र के आलोक में उठाया गया है। निर्देश के अनुसार, 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्ति के लेन-देन में पैन की जानकारी दर्ज करना और उसकी जांच करना जरूरी होगा, ताकि कर चोरी और बेनामी सौदों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 139ए और आयकर नियम 1962 के तहत इस तरह के सभी लेन-देन में पैन देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश पैन उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो संबंधित पक्ष को फॉर्म-60 भरना होगा। ऐसे सभी गैर-पैन लेन-देन की जानकारी अर्धवार्षिक रिपोर्ट के रूप में फॉर्म-61 के जरिए आयकर विभाग को भेजनी होगी। यह रिपोर्ट हर साल 31 अक्टूबर और 30 अप्रैल तक दाखिल करना अनिवार्य रहेगा।
सरकार के इस फैसले से संपत्ति के सौदों में पारदर्शिता बढ़ने और काले धन पर नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है। निबंधन विभाग का मानना है कि सख्त निगरानी से रियल एस्टेट सेक्टर में नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सकेगा और आयकर विभाग को भी जरूरी सूचनाएं समय पर मिलेंगी।
