भारत में इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ेगा दबदबा, 2035 तक बिक्री में हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद

भारत में सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप आने वाले वर्षों में तेजी से बदल सकता है। देश में इलेक्ट्रिक बसों की मांग लगातार बढ़ रही है और माना जा रहा है कि वित्त वर्ष 2035 तक वार्षिक बस बिक्री में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। फिलहाल यह आंकड़ा करीब 7 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन तेजी से बढ़ते निवेश, सरकारी योजनाओं और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण यह सेक्टर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
भारत में हर साल लगभग 35 हजार से 50 हजार बसों की बिक्री होती है। अब यह पूरा उद्योग धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधन से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ बढ़ रहा है। आने वाले समय में सरकारी खरीद कार्यक्रम, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और तकनीकी सुधार इस बदलाव को और तेज करने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन का इलेक्ट्रिफिकेशन देश के लिए केवल एक तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
देश में यात्रियों द्वारा तय की जाने वाली कुल दूरी का बड़ा हिस्सा बसों के जरिए पूरा होता है। अनुमान है कि करीब 57 प्रतिशत यात्रा बसों से की जाती है। ऐसे में यदि बस नेटवर्क तेजी से इलेक्ट्रिक मॉडल में बदलता है, तो इसका सीधा असर कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था पर पड़ेगा। सरकार भी इसी दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों की ओर बढ़ता रुझान अब केवल नीतियों तक सीमित नहीं रह गया है। यह पूरे मोबिलिटी इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव बनता जा रहा है। सरकारी टेंडरों, लागत में सुधार और नई तकनीकों के चलते इलेक्ट्रिक बसें अब परिवहन कंपनियों और राज्य परिवहन उपक्रमों के लिए अधिक व्यवहारिक विकल्प बन रही हैं। इसके साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।
भारत में इलेक्ट्रिक बसों को लेकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी तकनीक, फाइनेंसिंग मॉडल और परिचालन दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे इलेक्ट्रिक बसों की लागत कम होगी और उनका संचालन पहले की तुलना में अधिक आसान और लाभकारी बन सकेगा।
देशभर में अब तक लगभग 62 हजार इलेक्ट्रिक बसों के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 46 हजार बसें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत आवंटित भी की जा चुकी हैं। मार्च 2026 तक भारतीय सड़कों पर लगभग 16,300 इलेक्ट्रिक बसें चल रही थीं। यह आंकड़ा इस सेक्टर की तेजी से बढ़ती संभावनाओं को दिखाता है, हालांकि तैनाती और संचालन से जुड़ी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।
वर्तमान समय में भारत में चल रही अधिकांश इलेक्ट्रिक बसें सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक परिवहन उपक्रमों के माध्यम से संचालित हो रही हैं। आने वाले वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बड़े स्तर पर नए टेंडर जारी किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि वर्ष 2030 तक करीब 40 हजार अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों के लिए नए टेंडर निकाले जा सकते हैं, जिससे भारत का सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र पूरी तरह नई दिशा में आगे बढ़ेगा।
