बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्ती की तैयारी, उम्र आधारित प्रतिबंध पर भारत में तेज हुई चर्चा

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भारत में इस समय बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने पर गंभीर चर्चा चल रही है। सरकार अब उम्र के आधार पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल को सीमित करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिए हैं कि इस विषय पर सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बातचीत जारी है और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उचित समाधान तलाशा जा रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित एक एआई सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कई देशों में अब यह मान्यता बन रही है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर उम्र आधारित नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार डीपफेक जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए भी सख्त नियमों पर काम कर रही है। साथ ही आने वाले दो वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाओं का भी जिक्र किया गया, जो डिजिटल इकोसिस्टम को तेजी से बदल सकते हैं।

नई दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बताया कि सोशल मीडिया के कारण बच्चों की मानसिक सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल व्यवहार से जुड़ी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इसलिए सरकार तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर ऐसा ढांचा तैयार करना चाहती है जो बच्चों को सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण दे सके। इससे पहले आंध्र प्रदेश के एक मंत्री भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में पहल की बात कर चुके हैं, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाई जा सकती है।

वैश्विक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लागू किया है। इसके तहत Facebook, Instagram, TikTok, YouTube और Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आयु सीमा लागू की गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।

इसी दिशा में फ्रांस में भी 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक संसद में पारित किया गया है, हालांकि इसे कानून बनने से पहले सीनेट की मंजूरी मिलना अभी बाकी है। कई अन्य देश भी इसी तरह के कदमों पर विचार कर रहे हैं, जिससे साफ है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा अब वैश्विक नीति एजेंडा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की बढ़ती भागीदारी के साथ जोखिम भी बढ़े हैं, जिनमें साइबर बुलिंग, डेटा गोपनीयता, गलत जानकारी और डीपफेक जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे में उम्र आधारित प्रतिबंध या नियंत्रण को कई देश एहतियाती कदम के रूप में देख रहे हैं।

भारत में इस विषय पर चल रही चर्चा से संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव संभव हैं। यदि ऐसा होता है तो यह देश की डिजिटल नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा, जिसका उद्देश्य तकनीक के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना होगा।

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