मस्कत पहुंचा आईएनएसवी कौंडिन्य भारत और ओमान की प्राचीन समुद्री विरासत का बना प्रतीक

Untitled-5

ओमान की राजधानी मस्कत के सुल्तान काबूस बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के नौकायन पोत आईएनएसवी कौंडिन्य के पहुंचने के साथ भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने समुद्री रिश्तों का भव्य उत्सव देखने को मिला। केंद्रीय पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने खुद बंदरगाह पर पहुंचकर इस ऐतिहासिक यात्रा को पूरा करने वाले चालक दल का स्वागत किया और इसे दो महान सभ्यताओं के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक बताया।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि पोरबंदर से मस्कत तक की यह यात्रा केवल एक समुद्री सफर नहीं बल्कि भारत और ओमान के बीच हजारों वर्षों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्तों का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने बताया कि यह पारंपरिक तरीके से बना जहाज दोनों देशों की साझा समुद्री विरासत को नई पहचान देता है और ऐसे समय में यहां पहुंचा है जब भारत और ओमान अपने राजनयिक संबंधों के सत्तर वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं।

प्रसिद्ध भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर बने इस पोत को भारत की स्वदेशी समुद्री परंपरा शिल्प कौशल और टिकाऊ जहाज निर्माण का प्रतीक माना जा रहा है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना पर आधारित है जिसे भारतीय नौसेना ने पुरातत्वविदों पारंपरिक जहाज डिजाइनरों और कुशल कारीगरों के सहयोग से साकार किया। सोनोवाल ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि भारत की प्राचीन पोत निर्माण क्षमता को फिर से दुनिया के सामने लाने का यह एक गर्वपूर्ण प्रयास है।

बंदरगाह पर हुए स्वागत समारोह में ओमान के विरासत और पर्यटन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी अजान अल बुसैदी भारतीय नौसेना ओमान की राज नौसेना ओमान पुलिस तटरक्षक बल और दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग भी पारंपरिक भारतीय और ओमानी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ इस ऐतिहासिक पोत का स्वागत करने पहुंचे जिससे माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा।

इस मौके पर सर्बानंद सोनोवाल ने भारत के 84 लाख डॉलर के समुद्री विकास पैकेज की भी जानकारी दी जिसका उद्देश्य पोत निर्माण समूहों की स्थापना अनुसंधान और विकास सहायता और समुद्री विकास कोष के जरिए भारत के पोत निर्माण क्षेत्र को मजबूत करना है। उन्होंने भारत और ओमान के बीच हरित शिपिंग कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा और समुद्री विरासत तथा संग्रहालयों को लेकर हुए समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के ऐतिहासिक समुद्री संबंध और अधिक समृद्ध होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed