होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर, ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी सैन्य टकराव की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्षविराम के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसकी नौसेना इस रणनीतिक जलमार्ग पर लगातार निगरानी बनाए हुए है और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है। हाल के घटनाक्रम ने इस क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका को और बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अमेरिकी युद्धपोतों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने की कोशिश की, तो ईरानी नौसेना ने उन्हें चेतावनी देने के लिए गोलियां चलाईं। इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिकी सेना ने उसकी नागरिक नौकाओं को निशाना बनाया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। हालांकि अमेरिका का कहना है कि जिन नौकाओं पर कार्रवाई की गई, वे नागरिक नहीं बल्कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी थीं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान ने अभी अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति अमेरिका के लिए लंबे समय तक सहन करना मुश्किल होगा, जबकि ईरान अभी शुरुआती चरण में ही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की मौजूदगी ने इस क्षेत्र में जहाजरानी की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति को ज्यादा गंभीर मानने से इनकार किया है। उन्होंने हालिया घटनाओं को हल्का बताते हुए कहा कि यह कोई बड़ा सैन्य टकराव नहीं है। हालांकि उनके इस बयान के बावजूद क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां किसी बड़े संघर्ष की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं करतीं।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरानी बलों ने कई बार मिसाइलों, ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाओं के जरिए उन जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की, जिनकी सुरक्षा अमेरिकी सेना कर रही थी। जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी बलों ने कई खतरों को निष्क्रिय करने का दावा किया है, जिसमें कुछ छोटी नौकाओं को नष्ट करना और मिसाइलों व ड्रोन को मार गिराना शामिल है।
ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इस क्षेत्र से किसी भी व्यावसायिक जहाज या तेल टैंकर का आवागमन नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं। इस जलडमरूमध्य का वैश्विक तेल आपूर्ति में बेहद अहम स्थान है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है।
पिछले महीनों में हुई सैन्य घटनाओं के बाद से ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े समुद्री मार्गों पर सख्ती बढ़ा दी है। दोनों देशों की नौसेनाएं लगातार आमने-सामने की स्थिति में हैं, जिससे किसी भी छोटी घटना के बड़े संघर्ष में बदलने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं, जहां शांति और टकराव के बीच की दूरी बेहद कम रह गई है।
