11 साल बाद रणजी ट्रॉफी फाइनल में कर्नाटक, देवदत्त पडिक्कल के दोहरे शतक से रचा इतिहास
घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में कर्नाटक ने 11 साल बाद फाइनल में जगह बनाकर शानदार वापसी की है। दूसरे सेमीफाइनल में कर्नाटक और उत्तराखंड के बीच खेला गया मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में बड़ी बढ़त के आधार पर कर्नाटक ने फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। यह रोमांचक मुकाबला लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी एकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया, जहां पांच दिनों तक दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।
कर्नाटक ने पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 736 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम के कप्तान देवदत्त पडिक्कल ने दोहरा शतक जमाकर पारी को मजबूती दी और विपक्षी गेंदबाजों पर पूरी तरह दबाव बनाए रखा। उनके संयमित और तकनीकी रूप से मजबूत खेल ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। जवाब में उत्तराखंड की टीम पहली पारी में सिर्फ 233 रन पर सिमट गई, जिससे कर्नाटक को निर्णायक बढ़त मिल गई।
दूसरी पारी में कर्नाटक ने 323 रन बनाए और उत्तराखंड के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। हालांकि उत्तराखंड ने अंतिम दिन तक संघर्ष जारी रखा और पांचवें दिन 6 विकेट पर 260 रन बना लिए। मैच अंततः ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन पहली पारी की बढ़त के कारण कर्नाटक को फाइनल में प्रवेश मिला।
इस मुकाबले में देवदत्त पडिक्कल का प्रदर्शन सबसे अधिक चर्चा में रहा। उनकी दोहरी शतकीय पारी ने न केवल टीम को मजबूती दी बल्कि उनके नेतृत्व कौशल को भी उजागर किया। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जो उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रमाण है।
अब फाइनल में कर्नाटक का सामना जम्मू-कश्मीर से होगा। यह खिताबी मुकाबला 24 फरवरी को कर्नाटक के केएससीए हुबली क्रिकेट ग्राउंड में खेला जाएगा। घरेलू मैदान पर फाइनल खेलने का मौका कर्नाटक के लिए अतिरिक्त आत्मविश्वास लेकर आएगा।
रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचना किसी भी राज्य टीम के लिए गर्व का क्षण होता है, और 11 साल बाद यह उपलब्धि हासिल करना कर्नाटक के खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए विशेष महत्व रखता है। टीम का संतुलित प्रदर्शन और मजबूत बल्लेबाजी क्रम उन्हें खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाता है। अब सभी की नजरें फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं, जहां कर्नाटक एक बार फिर इतिहास रचने की कोशिश करेगा।
