गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का संदेश, त्रि-सेवा झांकी में दिखी भारत की सैन्य एकजुटता और ताकत

सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा प्रदर्शित कर दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ भारत की साहसिक कार्रवाई की याद दिलाई। यह प्रदर्शन पिछले वर्ष आतंकियों के खिलाफ किए गए सफल सैन्य अभियान की बहादुरी और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बना। इसी क्रम में भारतीय रक्षा बलों की त्रि-सेवा झांकी भी प्रस्तुत की गई, जिसकी थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता से जीत’ रखी गई थी। यह झांकी देश की सुरक्षा के लिए थलसेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतरीन तालमेल, एकता और सामूहिक शक्ति को दर्शाती नजर आई।
झांकी में इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर को खास तौर पर दिखाया गया, जिसने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में अहम भूमिका निभाई थी। इसमें यह रेखांकित किया गया कि किस तरह राष्ट्रीय और सैन्य नेतृत्व की सटीक योजना, सेनाओं के बीच मजबूत समन्वय और स्थानीय आबादी के सहयोग से यह अभियान सफल हुआ। ‘विरासत, विविधता और विकास’ के समन्वय को ऑपरेशन सिंदूर की विशिष्ट पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रदर्शन के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक प्रहार करते हुए दर्शाया गया, जबकि आकाश मिसाइल सिस्टम और एस-400 एयर डिफेंस नेटवर्क ने ‘सुदर्शन चक्र’ की अवधारणा के तहत आम नागरिकों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच का प्रतीक प्रस्तुत किया।
कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स सेगमेंट में शक्तिबाण के साथ दिव्यास्त्र को प्रदर्शित किया गया। हाई मोबिलिटी वाहनों पर तैनात ये स्वदेशी प्लेटफॉर्म भारतीय सेना के तकनीकी आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाते हैं। सर्विलांस और टारगेटिंग के एकीकृत कॉन्सेप्ट पर आधारित ये प्रणालियां तकनीक-संचालित और सटीक युद्ध क्षमता की ओर सेना की बड़ी छलांग मानी जा रही हैं।
शक्तिबाण और दिव्यास्त्र में झुंड वाले ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित हाइब्रिड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो तोपखाने की फायरिंग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये प्लेटफॉर्म समूह ड्रोन, लंबी दूरी के सटीक हमले वाले ड्रोन और प्रभावी युद्धक्षेत्र के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन की तैनाती को संभव बनाते हैं।
शक्तिबाण वाहन की कमान 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा ने संभाली, जबकि दिव्यास्त्र वाहन की कमान उसी रेजिमेंट के सूबेदार किरण मेदार के पास थी। यह प्रस्तुति ऑपरेशन में शामिल भारतीय सेना के जवानों की उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारी और प्रोफेशनलिज्म को दर्शाती है।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में लॉन्च किया गया था, जो 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में किया गया सैन्य अभियान था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद की गई कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया।
