मन की बात में पीएम मोदी का संदेश: जल संरक्षण बना जन आंदोलन, देशभर में लाखों संरचनाएं तैयार

Untitled-4

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को एक बार फिर जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि गर्मियों की शुरुआत के साथ ही यह समय पानी बचाने के संकल्प को दोहराने का है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता में काफी बढ़ोतरी हुई है और यह अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में बड़े स्तर पर जल संचय से जुड़े काम हुए हैं। इस दौरान करीब 50 लाख आर्टिफिशियल वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं तैयार की गई हैं, जो बारिश के पानी को सहेजने और उसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखने में मदद कर रही हैं। इसके साथ ही अमृत सरोवर अभियान के तहत देशभर में लगभग 70 हजार तालाब बनाए गए हैं, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बारिश के मौसम से पहले इन सरोवरों की सफाई और रखरखाव का काम तेजी से किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे उदाहरण साझा किए, जहां लोगों ने मिलकर जल संकट से निपटने के लिए प्रेरणादायक पहल की है। उन्होंने त्रिपुरा के एक पहाड़ी गांव का जिक्र किया, जहां पानी की गंभीर कमी थी और लोगों को दूर-दूर तक पानी के लिए जाना पड़ता था। लेकिन वहां के लोगों ने मिलकर हर घर में बारिश के पानी को सहेजने का सिस्टम लगाया, जिससे अब गांव में पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है।

इसी तरह छत्तीसगढ़ के एक जिले में किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर एक नया मॉडल अपनाया। इस पहल से बारिश का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे जमीन के अंदर जाकर भूजल स्तर को बढ़ाने लगा। इस प्रयास को अब सैकड़ों किसान अपना चुके हैं और इसका सकारात्मक असर पूरे इलाके में देखा जा रहा है।

तेलंगाना के एक गांव का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि वहां के लोगों ने मिलकर जल संरक्षण को एक सामूहिक अभियान बना दिया है। गांव के सैकड़ों परिवारों ने अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए हैं, जिससे न केवल पानी की समस्या कम हुई है बल्कि गंदे पानी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जब समाज एकजुट होकर काम करता है तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव हो जाता है।

प्रधानमंत्री ने अंत में देशवासियों से अपील की कि वे जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने में योगदान दें। उनका संदेश साफ था कि हर छोटा प्रयास मिलकर एक बड़ा बदलाव ला सकता है और यही सोच देश को जल संकट से बचाने में मदद करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed