PM मोदी की युवाओं को सलाह, ‘रील के युग’ में शॉर्टकट से बचें, आत्मकथाएं पढ़कर सीखें संघर्ष की कहानी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और महान लोगों के जीवन संघर्षों से सीख लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज का युवा ‘रील के युग’ में जी रहा है, लेकिन उसे यह समझना जरूरी है कि जीवन में सफलता हासिल करने का कोई आसान शॉर्टकट नहीं होता। गलत तरीके से अपनाया गया शॉर्टकट आगे चलकर नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से किताबों को समय देने और उनके माध्यम से अनुभव हासिल करने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने रामनाथ कोविंद के जीवन संघर्ष, उनके व्यक्तित्व और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं को रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा को उनके अपने शब्दों में पढ़ना चाहिए, क्योंकि उनके अनुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किताब को केवल विमोचन कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि युवाओं को इसे पूरा पढ़कर इसके अनुभवों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की आत्मकथा पढ़ने से उसके संघर्षों, सोच और जीवन में आने वाली चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिलता है। इससे युवा यह सीख सकते हैं कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद किस तरह लगातार प्रयास करते हुए आगे बढ़ा जा सकता है।

रामनाथ कोविंद के जीवन का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनका जीवन इस बात को दिखाता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोविंद ने जिन चुनौतियों का सामना किया, उनके बावजूद उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे।

प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के नाम का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ नाम अपने आप में पुस्तक का महत्वपूर्ण संदेश सामने रखता है। पीएम मोदी के अनुसार, रामनाथ कोविंद के संघर्ष भले ही व्यक्तिगत रहे हों, लेकिन उनके जीवन की सफलता भारतीय गणतंत्र और लोकतंत्र की सफलता से जुड़ी हुई है।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के सरल और विनम्र व्यवहार को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान जब वह राष्ट्रपति भवन में कोविंद से मिलने जाते थे, तो प्रोटोकॉल के बावजूद कोविंद कई बार औपचारिकताओं से अलग सहज तरीके से बातचीत करते थे। पीएम मोदी ने बताया कि रामनाथ कोविंद अक्सर प्रधानमंत्री को विदा करने के लिए कार के दरवाजे तक आते थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने कोविंद से ऐसा नहीं करने का आग्रह भी किया था, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी इस विनम्रता को कभी नहीं छोड़ा। पीएम मोदी ने युवाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा यह बताती है कि संघर्ष, धैर्य, विनम्रता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

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