पंजाब में सिंचाई क्रांति: 26% से बढ़कर 78% तक पहुंचा नहरी पानी, सरकार के बड़े दावे
चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य की सिंचाई व्यवस्था में हुए बड़े बदलावों और उपलब्धियों को विस्तार से साझा किया गया। सरकार ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं, जिनका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। खासतौर पर बंद पड़ी नहरों को दोबारा चालू करना और खेतों के आखिरी छोर तक पानी पहुंचाना इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य रहा है।
बताया गया कि वर्ष 2022 में जहां केवल 26 प्रतिशत क्षेत्र ही नहरी पानी के तहत आता था, वहीं 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि सिंचाई प्रणाली को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक कार्य किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस उपलब्धि के पीछे योजनाबद्ध तरीके से किए गए निवेश और लगातार निगरानी की बड़ी भूमिका रही है।
पिछले तीन वर्षों में सिंचाई ढांचे के विकास पर लगभग 6700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस दौरान 539 नहरों की सफाई की गई, जिससे उनमें पानी का प्रवाह सुचारू रूप से शुरू हो सका। इसके अलावा 349 नए खालों का निर्माण किया गया और 101 नहरों को पुनर्जीवित किया गया, जो लंबे समय से बंद पड़ी थीं। इन प्रयासों का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि पानी हर किसान तक पहुंचे और खेती में किसी तरह की कमी न आए।
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 1365 ऐसे स्थानों पर नहरी पानी पहुंचाया गया है, जहां पिछले 40 से 50 वर्षों से पानी नहीं पहुंच पाया था। यह पहल ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई है। इससे न केवल उनकी खेती बेहतर हुई है, बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि होने की संभावना है।
अब तक 14 हजार किलोमीटर लंबाई में नहरी खालों और पाइपलाइनों का निर्माण और मरम्मत कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 7 हजार किलोमीटर अतिरिक्त कच्चे खालों की पहचान की गई है, जिन्हें विकसित करने की योजना है। इस तरह कुल मिलाकर 21 हजार किलोमीटर नहरी नेटवर्क को मजबूत करने का लक्ष्य पूरा किया गया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सरकार का कहना है कि इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है। आने वाले समय में भी सिंचाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए काम जारी रहेगा, ताकि राज्य के किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सिंचाई क्षेत्र में किए गए इन सुधारों ने खेती-किसानी को नई दिशा दी है और राज्य में कृषि विकास को गति प्रदान की है। यह पहल आने वाले समय में किसानों की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
