श्रीनगर–जम्मू वंदे भारत ट्रेन 2 मई से शुरू, कश्मीर को मिलेगा निर्बाध तेज़ रेल संपर्क

जम्मू-कश्मीर में रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने जा रही है, क्योंकि श्रीनगर–जम्मू वंदे भारत सेवा का विस्तारित हिस्सा अब नियमित रूप से शुरू होने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव इस सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे, जिसके बाद 2 मई से यह ट्रेन आम यात्रियों के लिए नियमित रूप से उपलब्ध होगी। इस नई सुविधा से घाटी और जम्मू क्षेत्र के बीच यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान, तेज़ और आरामदायक हो जाएगी।
अब तक यात्रियों को श्रीनगर से जम्मू या अन्य हिस्सों की यात्रा के दौरान कटरा में ट्रेन बदलनी पड़ती थी, जिससे समय और असुविधा दोनों बढ़ते थे। लेकिन इस नई व्यवस्था के बाद श्रीनगर, जम्मू, कटरा और रियासी के बीच सीधी और निर्बाध यात्रा संभव हो जाएगी। इससे छात्रों, मरीजों, व्यापारियों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी। खासतौर पर बुजुर्ग यात्रियों और परिवारों के लिए यह सुविधा बेहद लाभकारी साबित होगी।
वंदे भारत एक्सप्रेस की लोकप्रियता को देखते हुए रेलवे ने इसमें कोचों की संख्या भी बढ़ा दी है। पहले इस ट्रेन में 8 कोच थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20 कोच कर दिया गया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अधिक संख्या में यात्री इस आधुनिक और तेज़ ट्रेन सेवा का लाभ उठा सकेंगे। बेहतर सीटिंग, आरामदायक सफर और कम यात्रा समय इसे यात्रियों के बीच और अधिक लोकप्रिय बना रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में सर्दियों के दौरान अक्सर भारी बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो जाता है, जिससे लोगों की आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होती है। ऐसे समय में यह वंदे भारत ट्रेन एक जीवनरेखा की तरह काम करेगी। यह ट्रेन माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी सुचारू रूप से चलने में सक्षम है, जिससे हर मौसम में विश्वसनीय संपर्क बना रहेगा।
इस नई रेल सेवा से व्यापार और पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। कश्मीर अपने हस्तशिल्प, पश्मीना शॉल, कालीन, लकड़ी की नक्काशी, सेब और केसर जैसे उत्पादों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। बेहतर रेल संपर्क से इन उत्पादों की आवाजाही तेज़ होगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा आसान होने से पर्यटन उद्योग को भी नई गति मिलेगी।
रेल मंत्री अपने दौरे के दौरान अंजी खड़ पुल और चिनाब रेल पुल का निरीक्षण भी करेंगे। अंजी पुल भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे पुल है, जबकि चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज माना जाता है। ये दोनों संरचनाएं भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही हैं और इस पूरे रेल नेटवर्क को और मजबूत बनाती हैं।
यह पूरा विस्तार उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक यानी USBRL परियोजना का हिस्सा है। 272 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 36 सुरंगें और 943 पुल शामिल हैं। यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र में रेल संपर्क को नई ऊंचाई देने का काम कर रही है। पिछले एक दशक में उधमपुर-कटरा खंड के शुरू होने से लेकर कश्मीर घाटी में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन और जम्मू रेलवे डिवीजन के गठन तक, यह विकास जम्मू-कश्मीर के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
