डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल पर बड़ा अपडेट, धामी सरकार ने बनाई समाधान की राह

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उत्तराखंड में चल रही डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल के बीच स्थिति को संभालने के लिए सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पदाधिकारियों ने मुलाकात की और अपनी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा। इस बैठक को हड़ताल के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से जारी असंतोष के बीच पहली बार दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर चर्चा करते नजर आए।

महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी 27 सूत्रीय मांगों का विवरण प्रस्तुत किया। इन मांगों में पदोन्नति से जुड़े मुद्दे, वेतनमान में सुधार और पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने जैसे प्रमुख विषय शामिल रहे। प्रतिनिधियों ने कहा कि इन मांगों पर लंबे समय से विचार नहीं किया गया, जिसके कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया और अंततः उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझेगी और जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि सभी मुद्दों का समुचित परीक्षण किया जाएगा ताकि एक संतुलित और व्यवहारिक समाधान निकाला जा सके। इसके लिए उन्होंने एक सब-कमेटी के गठन की घोषणा की, जो सभी बिंदुओं का गहन अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करेगी। यह कमेटी संबंधित विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर हर पहलू पर विचार करेगी, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत और पारदर्शी बन सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार संवाद और समन्वय के जरिए ही समस्याओं का समाधान निकालने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का टकराव या गतिरोध राज्य के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सभी पक्षों को सहयोगात्मक रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने इंजीनियर्स महासंघ से अपील की कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए बातचीत की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें और ऐसा रास्ता निकालने में सहयोग करें, जिससे जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी देखा जा रहा है कि सरकार एक ओर जहां कर्मचारियों की मांगों पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करने की कोशिश भी कर रही है कि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि विकास कार्यों और जनहित से जुड़े कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखा जाए।

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने स्थिति पर अपने विचार साझा किए और समाधान की दिशा में सुझाव दिए। इस बातचीत से यह संकेत मिला है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद की राह खुल गई है और आने वाले समय में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सब-कमेटी की रिपोर्ट क्या आती है और उसके आधार पर सरकार क्या फैसला लेती है।

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