कश्मीर में चिल्लई कलां के बीच सर्दी का असर, गुलमर्ग और पहलगाम में शून्य से नीचे पारा, नए साल पर लौटी पर्यटन की रौनक

dal-jhel

जम्मू कश्मीर में कड़ाके की ठंड के बीच श्रीनगर शहर में न्यूनतम तापमान शून्य से ऊपर पहुंच गया है, जबकि पहलगाम और गुलमर्ग जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में पारा अब भी जमाव बिंदु से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, गुलमर्ग में यह माइनस 4.5 डिग्री और पहलगाम में माइनस 1.6 डिग्री रहा। जम्मू क्षेत्र में भी ठंड का असर दिख रहा है, जहां जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री, कटरा में 9.5, बटोटे में 6.1, बनिहाल में 3.8 और भद्रवाह में 2.6 डिग्री दर्ज किया गया है।

गुरुवार को श्रीनगर का अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि गुलमर्ग में यह 4 और पहलगाम में 9 डिग्री दर्ज किया गया। दिन और रात के तापमान के बीच कम अंतर यह बताता है कि कश्मीर इस समय 40 दिनों तक चलने वाले चिल्लई कलां के दौर से गुजर रहा है, जो 21 दिसंबर से शुरू होकर 30 जनवरी तक रहता है। इस दौरान घाटी में सबसे भीषण ठंड पड़ती है और जलस्रोतों के जमने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो जाता है।

इस कड़ाके की सर्दी में झीलों और नदियों पर बर्फ जमने लगती है, जिससे नावों का संचालन मुश्किल हो जाता है। लोग ठंड से बचने के लिए ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनते हैं और फेरहन कश्मीर का सबसे लोकप्रिय शीतकालीन परिधान बन जाता है। पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी इसे पहनते हैं। फेरहन के नीचे पारंपरिक कांगड़ी रखी जाती है, जिसमें जलते हुए कोयले होते हैं और यह सदियों से कश्मीर की ठंड से लड़ने वाली संस्कृति का प्रतीक रही है।

इस बीच नए साल के मौके पर कश्मीर के पर्यटन स्थलों में रौनक लौटती दिख रही है। गुलमर्ग, श्रीनगर और पहलगाम में बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं और होटल तथा टूर ऑपरेटरों के अनुसार बुकिंग लगातार बढ़ रही है। 22 अप्रैल के आतंकी हमले के बाद कश्मीर की पर्यटन इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा था, लेकिन अब हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं। साल के अंत में बढ़ती पर्यटकों की संख्या से उन हजारों लोगों को उम्मीद मिली है, जिनकी रोजी रोटी इस उद्योग पर निर्भर है और माना जा रहा है कि आने वाला साल उनके लिए ज्यादा बेहतर और खुशहाल साबित होगा।

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