अल-नीनो के खतरे पर केंद्र सरकार अलर्ट, किसानों और राज्यों के लिए जारी हुए अहम निर्देश

केंद्र सरकार ने देश के कई हिस्सों में अल-नीनो के प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश की संभावना को गंभीरता से लेते हुए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी उद्देश्य से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य संभावित सूखे, कम वर्षा और उससे कृषि, जल संसाधनों तथा आम जनजीवन पर पड़ने वाले असर का आकलन करना और समय रहते आवश्यक कदम सुनिश्चित करना था।
बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और मौसम में होने वाले किसी भी बदलाव के अनुसार तुरंत कार्रवाई की जाए। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को पूरी सतर्कता के साथ कार्य करना होगा। राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि वे मौसम के अनुरूप फसलों का चयन और बुवाई कर सकें।
कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई है, जिनमें पानी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है। विशेष रूप से मिलेट्स और दलहन जैसी फसलों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी उत्पादन प्रभावित न हो। इसके साथ ही पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी गंभीरता से विचार किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन पर किसी प्रकार का संकट न आए।
बैठक में जल संसाधनों की स्थिति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सभी बड़े और छोटे जलाशयों के जलस्तर तथा भूजल की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि यदि किसी क्षेत्र में जल संकट की संभावना दिखाई दे तो समय रहते आवश्यक प्रबंधन किया जाए। इससे पेयजल और सिंचाई दोनों की जरूरतों को संतुलित ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी सरकार ने आवश्यक तैयारियों पर जोर दिया है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि देशभर में बिजली की निर्बाध और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि कृषि कार्यों, सिंचाई और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण यदि बिजली की मांग बढ़ती है तो उसके अनुरूप भी पहले से तैयारी रखने को कहा गया है।
बैठक में अधिकारियों ने यह जानकारी भी दी कि देश में चावल, गेहूं और अन्य आवश्यक खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। साथ ही आवश्यक वस्तुओं की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। सरकार लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी या मूल्य वृद्धि की स्थिति उत्पन्न न हो और आम लोगों को आवश्यक वस्तुएं उचित कीमत पर मिलती रहें।
इस दौरान हाल ही में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित असम और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों राज्यों में हुए नुकसान का वास्तविक आकलन करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम भेजने का निर्णय लिया गया है। यह टीम प्रभावित इलाकों का दौरा कर बुनियादी ढांचे, कृषि भूमि और रिहायशी क्षेत्रों में हुए नुकसान का विस्तृत मूल्यांकन करेगी, जिससे राहत और पुनर्वास से जुड़े फैसले तेजी से लिए जा सकें।
सरकार का मानना है कि मौसम की बदलती परिस्थितियों के बीच समय रहते की गई तैयारी ही संभावित नुकसान को कम कर सकती है। इसी सोच के साथ विभिन्न मंत्रालयों, वैज्ञानिक संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत किया जा रहा है ताकि किसानों, आम नागरिकों और राज्यों को हर संभव सहायता समय पर उपलब्ध कराई जा सके। आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति और मौसम के रुख के आधार पर आगे की रणनीति भी लगातार अपडेट की जाएगी।
