आईआईटी मद्रास में बोले एस जयशंकर, अच्छे पड़ोसियों से रिश्ते मजबूत और आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं

BERLIN, GERMANY - MAY 23: Indian Foreign Minister Subrahmanyam Jaishankar and German Foreign Minister Johann Wadephul (not pictured) speak to the media following talks on May 23, 2025 in Berlin, Germany. India and Germany are seeking stronger economic cooperation. (Photo by Sean Gallup/Getty Images)
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर चेन्नई में आईआईटी मद्रास में आयोजित फायरसाइड चैट कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जहां उन्होंने भारत की पड़ोस नीति, बांग्लादेश के हालिया दौरे और पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख पर खुलकर बात की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ रिश्ते व्यवहार और आपसी सम्मान के आधार पर तय करता है और जो देश भारत के साथ अच्छा व्यवहार करता है, उसके साथ रिश्ते स्वाभाविक रूप से मजबूत होते हैं।
विदेश मंत्री ने बताया कि वह दो दिन पहले बांग्लादेश में थे, जहां वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने गए थे। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा ऐसे पड़ोसी का समर्थन करता है जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता और इसी नीति के तहत भारत ने अपने अधिकांश पड़ोसियों को कोरोना वैक्सीन की पहली खेप भी भेजी थी।
बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले चुनावों को लेकर जयशंकर ने कहा कि भारत बांग्लादेश को शुभकामनाएं देता है और उम्मीद करता है कि चुनाव के बाद हालात सामान्य होने पर दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसी वाले रिश्ते और मजबूत होंगे।
उन्होंने यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुई वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने मुश्किल समय में अपने पड़ोसियों की मदद की है। श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत ने चार बिलियन डॉलर की सहायता दी और जब वहां तूफान आया तो भारतीय टीमें तुरंत राहत और बचाव कार्य के लिए पहुंचीं, यही एक जिम्मेदार और अच्छे पड़ोसी की पहचान है।
पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को अपने नागरिकों को आतंकवाद से बचाने का पूरा अधिकार है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जिस देश में दशकों से आतंकवाद पनप रहा हो, उसके साथ अच्छे पड़ोसी जैसे संबंध नहीं हो सकते और न ही ऐसे देश के साथ पानी या दूसरे संसाधन साझा किए जा सकते हैं।
आईआईटी मद्रास में जयशंकर का यह संबोधन भारत की स्पष्ट और सख्त विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें दोस्ती और सहयोग उन देशों के साथ है जो शांति और स्थिरता का सम्मान करते हैं, जबकि आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देने वालों के लिए कोई नरमी नहीं है।
