उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: चमोली में भूस्खलन से बंद हुआ नंदप्रयाग-नंदानगर मार्ग, यात्रियों और स्कूली बच्चों की बढ़ी मुश्किलें

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उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश का असर अब जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे सड़क संपर्क बार-बार बाधित हो रहा है। चमोली जिले में बुधवार सुबह नंदप्रयाग-नंदानगर मोटर मार्ग पर अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा गिरने के कारण सड़क पूरी तरह बंद हो गई। घटना के बाद दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और बड़ी संख्या में यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा। सुबह का समय होने की वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों, शिक्षकों और रोजाना इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार यह घटना चमन मंदिर के पास हुई, जहां बिना किसी पूर्व संकेत के पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर और मलबा सड़क पर आ गिरा। देखते ही देखते पूरे मार्ग पर आवाजाही रुक गई। कई लोग अपने वाहनों से उतरकर स्थिति का जायजा लेने लगे, जबकि कुछ शिक्षकों ने स्वयं आगे बढ़कर छोटे पत्थरों को हटाने का प्रयास भी किया। हालांकि विशाल बोल्डरों के कारण मार्ग को तुरंत खोल पाना संभव नहीं हो सका। इसके चलते स्थानीय लोगों के साथ-साथ विद्यार्थियों की दिनचर्या भी प्रभावित हुई और कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी देरी हुई।

लगातार हो रही वर्षा के कारण राज्य के कई पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। मौसम के मौजूदा हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में भी वर्षा का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पर्वतीय जिलों में कई स्थानों पर भारी बारिश के साथ गर्जन, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की आशंका बनी हुई है। ऐसे मौसम में भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं अचानक हो सकती हैं, जिससे सड़कें बंद होने और यातायात बाधित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

राज्य के कई जिलों में भारी बारिश के चलते नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर भी बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की संभावना है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर मलबा आने से आवाजाही प्रभावित हो सकती है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सड़कों को जल्द से जल्द सुचारु करने के लिए मशीनों और कर्मचारियों की मदद से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और यदि यात्रा करना जरूरी हो तो पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। विशेष रूप से पर्वतीय मार्गों पर वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के सक्रिय रहने के दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं सामान्य से अधिक हो सकती हैं। इसलिए स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। समय पर सतर्कता और सावधानी ही ऐसे मौसम में सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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