झारखंड छात्र आंदोलन: 16वें दिन भी जारी प्रदर्शन, देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ी तबीयत; 10 अगस्त को विधानसभा मार्च

झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के दो दौर हो चुके हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है।
छात्रों का कहना है कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल बुलाया जा रहा है, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा। प्रदर्शनकारी इसे महज आश्वासन और खोखले वादों तक सीमित बातचीत बता रहे हैं। छात्रों की सबसे बड़ी मांग कथित गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना है। इसके अलावा वे भविष्य में होने वाली भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रदर्शन स्थल पर डॉक्टरों की टीम पहुंची। जांच के दौरान उनका ब्लड शुगर काफी कम पाया गया, जिसके बाद उन्हें सलाइन दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक भोजन नहीं करने के कारण उन्हें कमजोरी और सीने में दर्द जैसी परेशानी हो रही है। हालांकि उनके दिल और फेफड़ों को सामान्य बताया गया है।
स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक छात्रों की मांगों का ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक वे भूख हड़ताल जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि देर रात उनका ब्लड शुगर काफी गिर गया था, जिसके बाद चिकित्सकों ने जांच की और सलाइन चढ़ाया। इसके बाद उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ।
अन्य छात्र नेताओं ने भी सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से प्रदर्शन स्थल से छात्रों को हटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन छात्र अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने साफ कर दिया है कि केवल बातचीत के लिए बुलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सरकार को उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई करनी होगी।
शुक्रवार को सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत का पहला दौर हुआ था। इसमें सरकार की ओर से पांच सदस्यीय और छात्रों की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था। छात्रों ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं और आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा था। इसके बाद शनिवार को बातचीत का दूसरा दौर भी हुआ, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
अब छात्र आंदोलन को और व्यापक करने की तैयारी में हैं। छात्र नेताओं के मुताबिक 10 अगस्त को विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला जाएगा। इससे पहले ही भूख हड़ताल और धरना जारी है। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल मौजूदा परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है और सभी की नजर आगामी विधानसभा मार्च तथा सरकार की अगली कार्रवाई पर है।
