देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया मकर संक्रांति पर्व

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नई दिल्ली। देशभर में आज मकर संक्रांति का पर्व पूरे श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रंगों के साथ मनाया गया। यह पर्व सर्दियों के अंत और सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और मौसम में धीरे-धीरे गर्माहट आने लगती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और सूर्य पूजा का विशेष महत्व होता है।

देश के विभिन्न हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, असम में भोगाली बिहू, पंजाब में लोहड़ी, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में संक्रांति तथा पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के नाम से जाना जाता है। हर क्षेत्र में लोग अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार इस पर्व को मनाते हैं।

उत्तर भारत में सुबह से ही श्रद्धालु नदियों और तालाबों में स्नान के लिए उमड़ पड़े। गंगा, यमुना, गोदावरी और अन्य पवित्र नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। लोगों ने स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दिया और जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कपड़े और अनाज का दान किया। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान पुण्य कई गुना फल देता है।

गुजरात में उत्तरायण के अवसर पर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा समेत कई शहरों में पतंगबाजी का उत्सव देखने को मिला। छतों पर लोग परिवार और दोस्तों के साथ पतंग उड़ाते नजर आए। बाजारों में पतंगों और मांझे की दुकानों पर सुबह से ही रौनक बनी रही।

तमिलनाडु में पोंगल का पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन भोगी, दूसरे दिन थाई पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कानूम पोंगल मनाया जाता है। घरों में चावल, दूध और गुड़ से बना विशेष व्यंजन ‘पोंगल’ तैयार किया गया और सूर्य देव को अर्पित किया गया।

असम में भोगाली बिहू के मौके पर लोगों ने सामूहिक भोज और पारंपरिक खेलों का आनंद लिया। गांवों में अलाव जलाकर लोग उत्सव मनाते दिखे। वहीं पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति पर विशेष रूप से पिठे और मिठाइयों का सेवन किया गया।

मकर संक्रांति का पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है। यह त्योहार हमें नई ऊर्जा, नई शुरुआत और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। देशभर में उत्सव की यह रौनक आने वाले समय के लिए सकारात्मकता और खुशहाली की उम्मीद जगाती है।

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