पुरी में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा आज से शुरू, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा आज से श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के बीच शुरू हो रही है। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पर्व का इंतजार देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं। रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक मानी जाती है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा और चक्रराज सुदर्शन के साथ मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही वजह है कि इस यात्रा को भगवान और भक्त के मिलन का सबसे पावन अवसर माना जाता है।
रथ यात्रा के शुभारंभ पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व भारतीय आस्था और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने लोकमान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ अपने भाई-बहन और चक्रराज सुदर्शन के साथ भक्तों के बीच आने के लिए मंदिर से बाहर निकलते हैं। उन्होंने कामना की कि भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद पूरे देश पर बना रहे और सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा खुशहाली का संचार हो।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जगन्नाथ रथ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह समानता, एकता और सामाजिक सद्भाव का भी संदेश देती है। उनके अनुसार यह पावन आयोजन समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करता है और यह दर्शाता है कि आस्था के सामने सभी भेदभाव समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा भारतीय संस्कृति के उन मूल्यों को मजबूत करती है, जो प्रेम, सहयोग और सामूहिक सहभागिता पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को रथ यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ की यह परंपरा सदियों से लोगों को प्रेरित करती आ रही है। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा विनम्रता, निस्वार्थ सेवा, सामूहिक भागीदारी और मानवता की भावना का सशक्त उदाहरण है। यही कारण है कि यह पर्व भारत की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ विश्वभर में भारतीय आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।
हर वर्ष आयोजित होने वाली इस भव्य यात्रा में लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन करते हैं और रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि रथ को खींचने से जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इस बार भी पूरे पुरी शहर को विशेष रूप से सजाया गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा तथा सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। देश और विदेश से आए श्रद्धालुओं के बीच उत्साह चरम पर है और सभी भगवान जगन्नाथ के दिव्य दर्शन के लिए उत्सुक हैं। यह पावन पर्व एक बार फिर आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संदेश लेकर देशभर में श्रद्धा का वातावरण बना रहा है।
