पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की जयंती पर भजन संध्या में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जन्म शताब्दी वर्ष भव्य रूप से मनाने की घोषणा

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर की जयंती के अवसर पर आयोजित भजन संध्या कार्यक्रम श्रद्धा, सम्मान और स्मृतियों से भरपूर रहा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में शामिल होकर पूर्व मुख्यमंत्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक योगदान तथा जनसेवा के प्रति समर्पण को याद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने भक्ति संगीत और श्रद्धा के वातावरण में बाबूलाल गौर को स्मरण किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वर्गीय बाबूलाल गौर के सम्मान में उद्घोष के साथ की और कहा कि वे केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि जनसेवा के ऐसे प्रतीक थे जिनकी छवि आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। उन्होंने कहा कि बाबूलाल गौर का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद वे हमेशा आम लोगों से जुड़े रहे। यही कारण था कि जनता का विश्वास उन्हें लगातार मिलता रहा और उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।
उन्होंने कहा कि बाबूलाल गौर का राजनीतिक सफर संघर्ष, समर्पण और जनता के प्रति जवाबदेही का उदाहरण था। लगातार कई बार चुनाव जीतना उनकी लोकप्रियता और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है। उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया तथा शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली में अनुशासन, निर्णय क्षमता और जनहित सर्वोपरि रहता था, जिसकी चर्चा आज भी राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में होती है।
मुख्यमंत्री ने उनके व्यक्तिगत जीवन के कई पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाबूलाल गौर का स्वभाव बेहद सरल, सहज और संवेदनशील था। वे केवल लोगों की समस्याओं को ही नहीं समझते थे, बल्कि समाज के हर वर्ग के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान और अपनापन था। प्रकृति और पशु-पक्षियों के प्रति उनका प्रेम भी उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान थी। वे मानवीय मूल्यों को जीवन में सर्वोच्च स्थान देते थे और यही गुण उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता था।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में बाबूलाल गौर की जन्म शताब्दी का अवसर प्रदेश के लिए विशेष महत्व रखेगा। उन्होंने संकेत दिया कि इस अवसर को व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी की जाएगी ताकि नई पीढ़ी को उनके जीवन, संघर्ष और योगदान के बारे में जानकारी मिल सके। उनका मानना है कि ऐसे व्यक्तित्वों की जीवन यात्रा समाज को प्रेरणा देती है और सार्वजनिक जीवन में सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करती है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भजन संध्या का आनंद लिया और श्रद्धा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री को याद किया। भक्ति संगीत और आध्यात्मिक वातावरण ने आयोजन को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भी बाबूलाल गौर के योगदान को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व को प्रेरणादायक बताया।
भजन संध्या केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि यह उस राजनीतिक विरासत को याद करने का अवसर भी बनी जिसने मध्यप्रदेश की राजनीति और विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाबूलाल गौर का जीवन आज भी जनसेवा, सादगी और समर्पण का प्रतीक माना जाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
