प्रगति बैठक में पीएम मोदी सख्त: 30 हजार करोड़ की परियोजनाओं की समीक्षा, टीबी मुक्त भारत और साइबर अपराध पर दिया बड़ा जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्रमुख विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य अभियानों और साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा करते हुए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करना, लंबित चुनौतियों की पहचान करना और उनके समाधान के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश देना था। बैठक में सड़क, बिजली, औद्योगिक गलियारे और मेट्रो रेल जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की बड़ी परियोजनाओं पर विशेष चर्चा की गई, जिनका देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।
बैठक के दौरान लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी विकास परियोजना में देरी केवल निर्माण कार्य को प्रभावित नहीं करती, बल्कि इससे लागत में वृद्धि होती है और आम जनता को मिलने वाले लाभ भी समय पर नहीं पहुंच पाते। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए और समयबद्ध तरीके से कार्यों को पूरा किया जाए।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक भारत के निर्माण के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा बेहद आवश्यक है। बेहतर सड़कें, उन्नत परिवहन प्रणाली, मजबूत बिजली नेटवर्क और औद्योगिक विकास देश की आर्थिक प्रगति की आधारशिला हैं। उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने और समन्वय को मजबूत बनाने की सलाह दी ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा विकास कार्यों को प्रभावित न कर सके।
बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण अभियान टीबी मुक्त भारत की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने तपेदिक उन्मूलन के लिए नई तकनीकों के उपयोग पर बल देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक की सहायता से मरीजों की पहचान, उपचार और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया और सुझाव दिया कि एनसीसी कैडेटों तथा माय भारत स्वयंसेवकों को जन-जागरूकता अभियानों से जोड़ा जाए ताकि समाज के हर वर्ग तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंच सके।
साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे तेजी से बढ़ते खतरों पर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आम नागरिकों की सुरक्षा और विश्वास से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के त्वरित निपटारे और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे ई-जीरो एफआईआर जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम करें ताकि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को तत्काल सहायता मिल सके। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि वे साइबर जागरूकता अभियान को और मजबूत करें, जिससे लोग ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अपराधों से बचाव के उपायों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकें।
बैठक में लिए गए निर्णय यह संकेत देते हैं कि सरकार एक ओर जहां देश की विकास परियोजनाओं को गति देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी समान प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इन पहलों का असर देश के विकास, जनकल्याण और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
