बांध सुरक्षा पर बड़ा फैसला: दिसंबर 2026 तक सभी राज्यों को पूरा करना होगा सुरक्षा मूल्यांकन, राष्ट्रीय समिति की अहम बैठक

देश में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा आधुनिक बनाने के उद्देश्य से नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष ने की, जिसमें विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, बांध सुरक्षा विशेषज्ञों और राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना था कि देशभर में बांधों की सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
बैठक के दौरान केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष ने बांध सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अब तक हुई प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अनुरूप विभिन्न नियमों की अधिसूचना जारी की जा चुकी है और तकनीकी दिशानिर्देशों के साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तैयार किए गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आपातकालीन कार्य योजनाओं, व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, संचालन एवं अनुरक्षण मैनुअल तथा जोखिम आकलन से जुड़े कार्यों में और अधिक तेजी लाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
बैठक में विशेषज्ञों ने जलाशयों में लगातार बढ़ रही गाद, पुराने बांधों की निगरानी, जल संरचनाओं की मजबूती और बदलते पर्यावरणीय हालात जैसी नई चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस दौरान इस बात पर सहमति बनी कि राज्य बांध सुरक्षा संगठनों को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर और अधिक सशक्त बनाया जाए, ताकि वे बांधों की नियमित निगरानी और सुरक्षा मानकों का बेहतर तरीके से पालन कर सकें। समिति ने यह भी माना कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय ही बांध सुरक्षा अधिनियम को सफलतापूर्वक लागू करने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगी।
बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी देने पर सहमति बनी। इनमें संवेदनशील बांधों की सुरक्षा और निगरानी के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार करना, सुरक्षा जांच चेकलिस्ट को अद्यतन करना, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में बांध सुरक्षा से संबंधित अलग अध्याय को अंतिम रूप देना तथा जांच, डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों के लिए मान्यता प्रणाली विकसित करना शामिल है। इसके अलावा बांध विफलता रिपोर्टिंग प्रणाली, जोखिम वर्गीकरण, आपातकालीन कार्य योजना और संचालन एवं अनुरक्षण मैनुअल को भी अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से कार्य करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में क्षमता निर्माण को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। समिति ने सुझाव दिया कि बांध सुरक्षा से जुड़े इंजीनियरों को नियमित रूप से उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु में संचालित स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में अधिक से अधिक अधिकारियों को नामांकित करने पर जोर दिया गया। साथ ही एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। समिति ने बांध मालिकों को तकनीकी संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की सलाह भी दी, जिससे आधुनिक तकनीकों और शोध का लाभ सीधे बांध सुरक्षा व्यवस्था को मिल सके।
बैठक के दौरान हाल के वर्षों में सामने आए कुछ बांधों से जुड़े मामलों की तकनीकी समीक्षा भी की गई। इनमें छत्तीसगढ़ के लुटी टैंक और राजाडेरा बांध, सिक्किम के तीस्ता स्टेज-III बांध, पंजाब के माधोपुर बैराज तथा राजस्थान के बीसलपुर बांध में चल रहे जलाशय ड्रेजिंग कार्यों का मूल्यांकन शामिल रहा। बैठक के समापन पर सभी राज्यों से आग्रह किया गया कि दिसंबर 2026 तक व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन, जोखिम आकलन और आपातकालीन कार्य योजनाओं से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं, ताकि देश की महत्वपूर्ण जल संरचनाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाया जा सके।
