भगवान देवनारायण न्याय और लोककल्याण के प्रतीक, उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

उज्जैन जिले के ग्राम जमालपुरा में आयोजित श्री देवनारायण कथा महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान देवनारायण के जीवन और उनके आदर्शों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान देवनारायण केवल किसी एक समाज या वर्ग के आराध्य नहीं हैं, बल्कि उनके विचार और जीवन दर्शन पूरे समाज को एकता, सेवा, न्याय और मानव कल्याण का संदेश देते हैं। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता की रक्षा करे, जरूरतमंदों की सहायता करे और समाज में समानता तथा न्याय की स्थापना करे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में ऐसे अनेक लोकनायक हुए हैं जिन्होंने अपने कार्यों और आदर्शों के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। भगवान देवनारायण भी उन्हीं महान विभूतियों में शामिल हैं, जिनका जीवन लोकसेवा, त्याग और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपने कार्यों से यह साबित किया कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की रक्षा करना ही वास्तविक धर्म है। यही कारण है कि आज भी लाखों श्रद्धालु उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान देवनारायण को लोक देवता के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है और उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। उनके जीवन से जुड़ी अनेक कथाएं आज भी लोगों को सदाचार, सेवा और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। समाज में न्याय और सद्भाव स्थापित करने के लिए उन्होंने जो कार्य किए, वे वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे।
मुख्यमंत्री ने उज्जैन से भगवान देवनारायण के विशेष संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि से उनका गहरा जुड़ाव रहा है और उनका जीवन यहां की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं से भी प्रभावित रहा। यही कारण है कि उज्जैन क्षेत्र के लोगों में भगवान देवनारायण के प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था देखने को मिलती है।
उन्होंने कथा महोत्सव के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। कथा, सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम केवल आध्यात्मिक ज्ञान देने का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का भी कार्य करते हैं। लगातार कई वर्षों से आयोजित हो रहा यह कथा महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आस्था और ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार सेवा, सहयोग और परोपकार की भावना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाए तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। भगवान देवनारायण का जीवन इसी विचारधारा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज के उत्थान के लिए कार्य करें।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। धार्मिक वातावरण और भक्ति भाव से परिपूर्ण इस आयोजन ने लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। कथा महोत्सव के माध्यम से भगवान देवनारायण के जीवन, उनके संघर्षों और लोककल्याणकारी कार्यों का संदेश जन-जन तक पहुंच रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।
