भारत-रूस ने आतंकवाद के खिलाफ बढ़ाया सहयोग, सीमा पार आतंक और नई तकनीक के दुरुपयोग पर बनी साझा रणनीति

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भारत और रूस ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आयोजित संयुक्त कार्य समूह की बैठक में सीमा पार आतंकवाद, आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों, नई तकनीकों के दुरुपयोग और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप दोनों देशों के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाना तथा आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना था।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट होकर कार्रवाई की आवश्यकता है। विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए दोनों पक्षों ने ऐसे सभी प्रयासों की कड़ी निंदा की। हाल के वर्षों में भारत में हुए आतंकी हमलों का भी उल्लेख किया गया और निर्दोष नागरिकों पर हुए हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया गया।

दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि केवल पारंपरिक आतंकवादी गतिविधियां ही नहीं, बल्कि नई और उभरती तकनीकों का दुरुपयोग भी वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड संचार, ऑनलाइन कट्टरपंथ, साइबर माध्यमों के जरिए भर्ती और डिजिटल वित्तीय प्रणालियों का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन तेजी से कर रहे हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए तकनीकी सहयोग, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रयासों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

बैठक में आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की दिशा में भी व्यापक चर्चा हुई। दोनों देशों ने माना कि आतंकवादी संगठनों की आर्थिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किए बिना आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को पूरी तरह सफल नहीं बनाया जा सकता। इसी कारण वित्तीय नेटवर्क, अवैध लेनदेन और आतंकियों तक पहुंचने वाले संसाधनों की निगरानी बढ़ाने के लिए सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

भारत और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में शामिल आतंकवादी संगठनों, उनके सहयोगी नेटवर्क और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके साथ ही दोनों देशों ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर उभरते आतंकी खतरों का संयुक्त रूप से सामना करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों को मजबूत बनाने पर भी दोनों पक्षों ने सकारात्मक रुख अपनाया।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनाई गई रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते सुरक्षा माहौल में भारत और रूस के बीच इस तरह का सहयोग न केवल दोनों देशों की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों को भी नई दिशा देगा। बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि दोनों देशों के बीच आतंकवाद निरोधक सहयोग भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा और अगली संयुक्त बैठक रूस में आयोजित की जाएगी, जहां इस दिशा में आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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