मध्य पूर्व संकट के बीच भारत पूरी तरह तैयार, कच्चे तेल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार, ऊर्जा आपूर्ति पर नहीं होगा असर

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। खासतौर पर हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका ने दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि इस चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भारत की स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पहले से की गई तैयारियों, पर्याप्त रणनीतिक भंडारण और विविध आयात स्रोतों के कारण देश फिलहाल किसी बड़े संकट की स्थिति में नहीं है।
हालिया घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसके बावजूद वैश्विक बाजार में गैर-ओपेक देशों द्वारा बढ़ाए गए उत्पादन की वजह से आपूर्ति पूरी तरह बाधित होने की आशंका फिलहाल सीमित मानी जा रही है।
भारत ने संभावित जोखिमों को देखते हुए पहले ही अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पर्याप्त तैयारी कर ली थी। देश ने अगस्त महीने तक की आवश्यकता के अनुरूप कच्चे तेल और एलपीजी के आयात को पहले ही सुरक्षित कर लिया है। इसके अलावा रणनीतिक भंडार में भी पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है, जिससे किसी भी अस्थायी व्यवधान की स्थिति में घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना काफी कम हो जाती है। उपलब्ध भंडार के अनुसार देश के पास लगभग 60 दिनों तक कच्चे तेल की जरूरत पूरी करने लायक स्टॉक मौजूद है। इसके साथ ही प्राकृतिक गैस का भी लगभग 60 दिनों का भंडार उपलब्ध है, जबकि एलपीजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर रिफाइनरियों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। विशेष रूप से सितंबर और अक्टूबर के दौरान लागत में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में यह चुनौती ऐसी नहीं मानी जा रही है जिसे संभाला न जा सके। आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए पहले से किए गए अनुबंध और वैकल्पिक आयात स्रोत भारत के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो रहे हैं।
देश में एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर पहले लागू की गई कई पाबंदियों में भी पहले ही ढील दी जा चुकी है, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता बेहतर बनी हुई है। सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर त्वरित निर्णय लेने की तैयारी भी कर रही है ताकि आम उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
कुल मिलाकर मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा रणनीति, मजबूत भंडारण क्षमता और समय रहते किए गए आयात प्रबंध देश को इस चुनौतीपूर्ण दौर में अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में रखते हैं। यही कारण है कि फिलहाल देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है और आम उपभोक्ताओं को भी तत्काल किसी बड़े संकट या भारी कमी की आशंका से राहत मिल सकती है।
