मध्यपूर्व तनाव के बावजूद मजबूत बनी भारत की अर्थव्यवस्था, 2026 में 6.4% विकास दर का अनुमान

वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और मध्यपूर्व में जारी तनाव के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। हालांकि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिला है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और लगातार बेहतर आर्थिक गतिविधियों ने विकास की रफ्तार को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी वजह से आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहने की उम्मीद है।
वर्ष 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत रखा गया है। यह पहले जारी किए गए अनुमान से थोड़ा कम है, लेकिन इसे किसी बड़े जोखिम के रूप में नहीं देखा जा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत सहित कई देशों की विकास दर पर पड़ा है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और घरेलू खपत लगातार आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही है।
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में उद्योग, सेवा क्षेत्र और उपभोक्ता मांग से जुड़े कई संकेत उम्मीद से बेहतर रहे हैं। बाजार में मांग बनी रहने, निवेश गतिविधियों में सुधार और सरकारी पूंजीगत व्यय के कारण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। यही वजह है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का प्रदर्शन कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर माना जा रहा है।
मध्यपूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का सबसे बड़ा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। तेल महंगा होने से ऊर्जा आयात करने वाले देशों की लागत बढ़ जाती है और इसका असर महंगाई के साथ-साथ आर्थिक विकास पर भी पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाला हर बड़ा बदलाव सीधे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की कई वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है।
इसके बावजूद अगले वर्ष के लिए भारत की आर्थिक तस्वीर अधिक सकारात्मक दिखाई दे रही है। अनुमान है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दबाव धीरे-धीरे कम होंगे, जिससे आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी। निवेश, उपभोग और उत्पादन में सुधार के साथ विकास दर में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मध्यम अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि लगभग 6.5 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहने की संभावना जताई जा रही है, जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत प्रदर्शन माना जाएगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था भी धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही है। हालांकि महंगाई अभी भी कई देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है और इसमें अपेक्षित तेजी से कमी नहीं आई है। इसके साथ ही नई तकनीकों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ते निवेश से उत्पादकता बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है। आने वाले समय में यदि ऊर्जा बाजार स्थिर रहता है और वैश्विक तनाव कम होते हैं, तो भारत के लिए आर्थिक विकास की संभावनाएं और अधिक मजबूत हो सकती हैं।
