मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उद्यानिकी फसलें छोटी जगह से बड़ी कमाई करने का प्रभावी माध्यम है। प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को इससे जोड़ा जाये। किसानों को सीज़नल और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के लिए प्राकृतिक खाद का उपयोग कर जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उद्यानिकी फसलों के माध्यम से किसानों की वास्तविक आय बढ़ाई जाए। किसानों की आय वृद्धि और उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिये योजनाबद्ध तरीके से उद्यानिकी फसलों और इनके जोत रकबे का साल-दर-साल विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारी उद्यानिकी एवं मसाला फसलों की अंतर्राष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। इसकी पूर्ति के लिए बाजार तलाशें, उद्यानिकी उत्पादों की भरपूर ब्रांडिग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यहां औषधीय गुणों से भरपूर फसलों की खेती भी बहुतायत में की जाती है। इनकी बड़ी संभावनाएँ है। औषधि निर्माण के लिए जरूरी इन फसलों की इन्टरनेशनल मार्केट में मांग अनुसार आपूर्ति के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में हर साल नये-नये आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल खोले जा रहे हैं। इनमें देशी/आयुर्वेदिक दवाईयों की आपूर्ति में प्रदेश की औषधीय फसलों एवं उप-उत्पादों का भरपूर उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि मसाला फसलों के उत्पादन में हम पूरे देश में पहले स्थान पर है। यह उपलब्धि हमें इस क्षेत्र में और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मंत्रालय में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विभागीय संचालित योजनाओं की प्रगति और हितग्राहियों को लाभ प्रदाय पर गहन चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ – 2028 के मद्देनजर उज्जैन में फूलों की खेती को प्रोत्साहन एवं विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए उज्जैन में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। सेंटर स्थापना के लिए उज्जैन शहर के पास एक गांव में 19 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर समुचित समन्वय भी किया जा रहा है।

दुनिया में मिलेगी मप्र की उद्यानिकी फसलों को पहचान

बैठक में बताया गया गया कि वर्ष 2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। बागवानी फसलों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिएप्रदेश में हॉर्टिकल्चर प्रमोशन एजेंसी की स्थापना करने की कार्रवाई जारी है।

मध्यप्रदेश के उद्यानिकी उत्पादों को दुनिया में पहचाना जाएगा। इसके लिए जी आई टैग दिलवाने की प्रक्रिया जारी है। विशेष रूप से जबलपुरी मटर, गुना का कुंभराज धनिया, बुरहानपुर का केला, रतलाम का रियावन लहसुन, खरगोन की मिर्च, इंदौर का मालवी आलू, बरमन भटा, छतरपुर का पान जैसे उद्यानिकी उत्पादों को जल्दी ही विशिष्ट भौगोलिक पहचान मिल जाएगी।

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