वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में हुई प्रकृति संरक्षण विषय पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला

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वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में प्रकृति संरक्षण विषय पर दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 13 जिलों के 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक श्री शुभरंजन सेन ने कहा कि समाज में यदि कोई परिवर्तन लाना हो, तो उसके लिये विद्यार्थियों का साथ आना बहुत जरूरी है। विद्यार्थियों के मानस में परिवर्तन करने के लिये शिक्षक ही सबसे उपयोगी साबित हो सकता है। यदि शिक्षक प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक हो जाये, तो निश्चित ही वह अपने विद्यार्थियों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिये प्रेरित कर पायेंगे। श्री सेन प्रकृति संरक्षण विषय पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

कार्यशाला में परियोजना के सलाहकार एवं संयोजक श्री श्री आर.निवास मूर्ति ने कहा कि समाज को आज प्रकृति संरक्षण के लिये प्रेरित करने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। प्रकृति संरक्षण और विभिन्न आयामों एवं उनसे होने वाली समस्याओं से निपटने के लिये हमें आगे आने वाली पीढ़ी, जो विद्यार्थियों के रूप में हमारे सामने है, को सचेत करते हुए उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिये प्रेरित करना चाहिये। इसके लिये शिक्षक बहुत महत्वपूर्ण कड़ी है। संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान ने कहा कि शिक्षक यहाँ से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने विद्यालय और आसपास के अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रकृति संरक्षण के अभियान से जोड़ने के लिये प्रेरित करेंगे।

कार्यशाला के समापन समारोह के विशेष अतिथि डॉ. सुहास कुमार ने कहा कि यदि हमें हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिये रहने योग्य पृथ्वी देना है, तो हमें आज ही प्रकृति संरक्षण को अपने दैनिक जीवन में अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि इसमें अगर देर हुई तो शायद हम फिर एक स्वस्थ वातावरण को न पा सकेंगे। सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश जैव विविधता बोर्ड श्री अजय यादव ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला की सफलता पर मुझे पूरा विश्वास है कि शिक्षकों के माध्यम से बच्चों में गुणात्मक रूप से जैव विविधता संरक्षण के संदेश को पहुँचाया जायेगा।

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