अनाहत सिंह ने रचा इतिहास, वर्ल्ड स्क्वाश जूनियर चैंपियनशिप 2026 जीतने वाली पहली भारतीय बनीं

भारतीय स्क्वाश के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। देश की युवा स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड स्क्वाश जूनियर चैंपियनशिप 2026 का खिताब जीतकर ऐसा कारनामा किया है, जो इससे पहले कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं कर सका था। फाइनल मुकाबले में उन्होंने मिस्र की रुकैया सलेम को लगातार तीन गेम में 11-3, 11-7 और 11-9 से हराकर विश्व जूनियर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ अनाहत जूनियर विश्व स्क्वाश चैंपियनशिप जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।
अनाहत सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल का प्रदर्शन किया। उनकी फिटनेस, तेज़ मूवमेंट, सटीक शॉट्स और मानसिक मजबूती हर मुकाबले में देखने को मिली। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान एक भी गेम नहीं गंवाया। हर मैच में उन्होंने अपने विरोधियों पर पूरी तरह दबदबा बनाए रखा और शानदार प्रदर्शन के दम पर खिताब अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय स्क्वाश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
फाइनल मुकाबले में अनाहत ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। पहले गेम में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया और आसानी से 11-3 से जीत दर्ज की। दूसरे गेम में भी उन्होंने लगातार बढ़त बनाए रखी और 11-7 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। तीसरे गेम में मिस्र की खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश की, लेकिन अनाहत ने संयम और आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए 11-9 से जीत हासिल कर मैच समाप्त कर दिया। उनकी इस जीत ने दर्शकों और खेल विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया।
इस जीत का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि जूनियर विश्व स्क्वाश चैंपियनशिप में पिछले 16 वर्षों से मिस्र के खिलाड़ियों का दबदबा कायम था। अनाहत सिंह ने इस लंबे वर्चस्व को समाप्त करते हुए साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी भी विश्व स्तर पर किसी से कम नहीं हैं। उनकी सफलता भारतीय स्क्वाश के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है और इससे देश के युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
अब अनाहत सिंह का अगला लक्ष्य लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक है। यह पहली बार होगा जब स्क्वाश को ओलंपिक खेलों में शामिल किया जाएगा। ऐसे में उनकी यह उपलब्धि भारतीय खेल जगत के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि वह अपनी मौजूदा लय और प्रदर्शन को बरकरार रखती हैं, तो आने वाले वर्षों में ओलंपिक पदक की मजबूत दावेदार बन सकती हैं।
वहीं पुरुष वर्ग में भारत के एशियाई जूनियर चैंपियन आर्यवीर देवान ने भी सराहनीय प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रतियोगिता के अंतिम 16 खिलाड़ियों में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। हालांकि वह आगे का सफर तय नहीं कर सके, लेकिन उनका प्रदर्शन भारतीय स्क्वाश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत देता है।
अनाहत सिंह की ऐतिहासिक जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्क्वाश के विकास, युवा प्रतिभाओं की मेहनत और खेल के प्रति बढ़ते उत्साह का प्रतीक भी है। उनकी इस सफलता ने देशभर के खिलाड़ियों में नया आत्मविश्वास जगाया है और उम्मीदें बढ़ा दी हैं कि आने वाले वर्षों में भारत स्क्वाश के वैश्विक मंच पर और भी बड़े मुकाम हासिल करेगा।
