विश्व जनसंख्या दिवस पर कोरबा में जागरूकता की अनूठी पहल, छात्रों ने रैली, नुक्कड़ नाटक और मानव श्रृंखला से दिया छोटा परिवार का संदेश

विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर कोरबा जिले के चैतमा क्षेत्र में जनसंख्या स्थिरीकरण और परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों के प्रति समाज को जागरूक करना और छोटे परिवार, बेहतर स्वास्थ्य तथा संतुलित विकास का संदेश आम लोगों तक पहुंचाना था। विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर सामाजिक जागरूकता का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया।
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, चैतमा में आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत चित्रकला प्रतियोगिता से हुई। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक सोच के माध्यम से बढ़ती जनसंख्या के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं को चित्रों के जरिए प्रस्तुत किया। बच्चों ने गरीबी, बेरोजगारी, पर्यावरण पर बढ़ते दबाव, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग और सामाजिक असंतुलन जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। साथ ही उन्होंने छोटे परिवार के लाभ, महिलाओं के सम्मान, लैंगिक समानता और स्वस्थ समाज के निर्माण जैसे सकारात्मक संदेश भी अपनी कलाकृतियों में उकेरे। विद्यार्थियों की रचनात्मकता ने सभी उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
इसके बाद राष्ट्रीय सेवा योजना और इको क्लब के स्वयंसेवक ग्राम पंचायत चैतमा के प्रमुख बाजार क्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस नाटक के माध्यम से परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल भाषा में लोगों के सामने रखा गया। नाटक में यह संदेश दिया गया कि जनसंख्या स्थिरीकरण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों ने इस प्रस्तुति को गंभीरता से देखा और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के अगले चरण में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई। यह मानव श्रृंखला समाज में एकता, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनी। इसके बाद पूरे क्षेत्र में जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें छात्र-छात्राएं हाथों में संदेश देने वाली तख्तियां लेकर शामिल हुए। रैली के दौरान छोटे परिवार, बेहतर स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जनसंख्या संतुलन से जुड़े संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने भी इस अभियान में रुचि दिखाई और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस केवल जनसंख्या के आंकड़ों पर चर्चा करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज को उन चुनौतियों के प्रति जागरूक करने का दिन है जो अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि के कारण सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए जनसंख्या स्थिरीकरण अत्यंत आवश्यक है। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को समझेगा, तभी सतत विकास और समृद्ध भविष्य का सपना साकार हो सकेगा।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों ने यह संदेश दिया कि जागरूकता ही किसी भी सामाजिक परिवर्तन की सबसे मजबूत नींव होती है। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रचनात्मक गतिविधियों ने न केवल लोगों को सोचने के लिए प्रेरित किया, बल्कि यह भी साबित किया कि युवा पीढ़ी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है। इस पूरे अभियान ने विश्व जनसंख्या दिवस के उद्देश्य को सार्थक करते हुए समाज में जिम्मेदार नागरिक बनने और संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रभावशाली संदेश दिया।
