सेमिकॉन 2.0 से भारत में आएगी हाई-टेक नौकरियों की बंपर बहार, अगले 5 वर्षों में 2 लाख रोजगार और ग्लोबल चिप हब बनने की बड़ी तैयारी

भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अग्रणी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की सेमिकॉन 2.0 योजना को एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल से अगले पांच वर्षों के दौरान लगभग 1.5 लाख से 2 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल नई नौकरियां पैदा करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर चिप डिजाइन, अनुसंधान, इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक तकनीकी नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सेमिकॉन 2.0 का दूसरा चरण पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और तकनीक-केंद्रित माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल चिप निर्माण इकाइयों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसा मजबूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA), कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विनिर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग और स्मार्ट सप्लाई चेन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा सके। इससे भारत में उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी कौशल और अनुसंधान क्षमता का तेजी से विस्तार होने की संभावना है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेमिकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण से जुड़े पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है, ताकि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से देश में विदेशी निवेश बढ़ेगा, अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण होगा और घरेलू उद्योगों को भी नई गति मिलेगी।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा। आने वाले वर्षों में केवल पारंपरिक तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि एआई, चिप डिजाइन, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और एडवांस्ड इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ेगी। यही कारण है कि कंपनियां अब ऐसे इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की तलाश कर रही हैं, जो भविष्य की तकनीकों के साथ काम करने में सक्षम हों।
इसके साथ ही वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर इंजीनियरिंग, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं, इंजीनियरिंग छात्रों और तकनीकी पेशेवरों को मिलेगा, जिन्हें देश के भीतर ही विश्वस्तरीय रोजगार और करियर के नए अवसर प्राप्त होंगे।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग लंबे समय तक मुख्य रूप से असेंबली आधारित रहा है, लेकिन सेमिकॉन 2.0 के माध्यम से अब देश चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और एडवांस्ड पैकेजिंग जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार ने इस मिशन के तहत चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन यूनिट, एटीएमपी और ओसैट इकाइयों, अनुसंधान एवं विकास तथा कौशल विकास जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है। इन पहलों से भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का विश्वसनीय भागीदार बनाने के साथ-साथ भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार तैयार होने की उम्मीद है।
