अनुराग जैन बने नीति आयोग के नए सीईओ, केंद्र सरकार ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

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केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी अनुराग जैन को नीति आयोग का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ देश के प्रमुख नीति निर्माण संस्थान को एक अनुभवी प्रशासक का नेतृत्व मिलेगा, जिन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक करियर में केंद्र और राज्य सरकारों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नीति आयोग विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार के साथ मिलकर कई रणनीतिक योजनाओं पर काम कर रहा है।

अनुराग जैन वर्ष 1989 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में उनके पास तीन दशकों से अधिक का अनुभव है और उन्होंने विभिन्न विभागों में नीतिगत निर्णयों, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया है। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। वे अपने स्वीकृत सेवा विस्तार की अवधि तथा उसके बाद कुल दो वर्षों तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, इस पद पर कार्य करेंगे।

नीति आयोग देश की दीर्घकालिक विकास रणनीतियों को तैयार करने, राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने और विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों को बढ़ावा देने वाला प्रमुख संस्थान है। ऐसे में सीईओ की भूमिका संगठन के प्रशासनिक संचालन, विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय और नीति संबंधी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अनुराग जैन का व्यापक प्रशासनिक अनुभव इस दिशा में नीति आयोग के कार्यों को नई गति देने में सहायक माना जा रहा है।

हाल के महीनों में नीति आयोग के नेतृत्व ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि संगठन में कई नए पूर्णकालिक सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें राजीव गौबा, प्रोफेसर के. वी. राजू, प्रोफेसर गोबर्धन दास, डॉ. एम. श्रीनिवास और प्रोफेसर अभय करंदीकर शामिल हैं। इन नियुक्तियों का उद्देश्य नीति आयोग की विशेषज्ञता को और मजबूत बनाना तथा विभिन्न क्षेत्रों में नीति निर्माण की क्षमता को बढ़ाना है।

इसी दौरान नीति आयोग ने राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी और सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निवेश अनुकूलता सूचकांक 2026 भी जारी किया। इस सूचकांक में गुजरात ने 56.6 अंकों के साथ प्रमुख राज्यों में पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इस मूल्यांकन में राज्यों का आकलन नीति एवं शासन, बुनियादी ढांचा, व्यापार सुगमता, वित्तीय प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों सहित कुल 84 संकेतकों के आधार पर किया गया। इस पहल का उद्देश्य राज्यों को बेहतर नीतियां अपनाने और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

नीति आयोग देश को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी दिशा में हाल ही में नई दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक आयोजित की गई थी। “विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास” विषय पर केंद्रित इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहली बार था जब सभी 28 राज्यों की इस महत्वपूर्ण बैठक में भागीदारी दर्ज की गई, जिससे सहकारी संघवाद को और मजबूती मिली।

अनुराग जैन की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश आकर्षित करने, नवाचार, रोजगार सृजन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। नीति आयोग इन सभी क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीतियां तैयार करने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अनुराग जैन से उम्मीद की जा रही है कि वे नीति आयोग के कार्यों को और अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुख और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। आने वाले समय में उनकी अगुवाई में नीति आयोग केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में नई पहल और सुधारों को गति दे सकता है।

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