ब्रिक्स स्वास्थ्य बैठक में भारत का बड़ा विजन: मजबूत हेल्थ सिस्टम, डिजिटल स्वास्थ्य और वैश्विक सहयोग पर नौ प्राथमिकताएं तय

भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठकों के तहत चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मजबूत, समावेशी और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना, साझा चुनौतियों का समाधान तलाशना और ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों के आगामी घोषणापत्र को अंतिम रूप देने की दिशा में सहमति बनाना था। बैठक के दौरान भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक रणनीति प्रस्तुत करते हुए नौ प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का विस्तृत खाका भी साझा किया, जिनका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देना है।
बैठक के उद्घाटन सत्र में यह रेखांकित किया गया कि विस्तारित ब्रिक्स समूह आज वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य, महामारी जैसी चुनौतियों और नई स्वास्थ्य आवश्यकताओं को देखते हुए सदस्य देशों के बीच समन्वय और ज्ञान साझाकरण पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” की थीम को केंद्र में रखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसे समाधान विकसित करने पर जोर दिया, जो सभी देशों के लिए समान रूप से उपयोगी और टिकाऊ साबित हो सकें।
बैठक में भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नौ प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान प्रस्तुत की। इनमें स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत बनाना, भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए बेहतर तैयारी, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बेहतर समन्वय, नियामक ढांचे को और प्रभावी बनाना, कुशल स्वास्थ्य कार्यबल तैयार करना, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना तथा आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की समय पर, किफायती और समान उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। इन क्षेत्रों पर सामूहिक रूप से कार्य करने से सदस्य देशों की स्वास्थ्य प्रणालियां अधिक सक्षम और लचीली बन सकती हैं।
भारत ने बैठक के दौरान अपनी कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहलों का भी प्रस्तुतीकरण किया। स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित ब्रिक्स मिशन तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहलों को सदस्य देशों के सामने रखा गया। इन पहलों का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य क्षेत्र में ज्ञान तथा अनुभवों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना भी है। इससे सदस्य देशों के बीच सहयोग और अनुसंधान को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बैठक के दौरान ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों के घोषणापत्र के मसौदे पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने मसौदे के अलग-अलग प्रावधानों पर अपने सुझाव साझा किए और सहमति बनाने की दिशा में सकारात्मक चर्चा की। उम्मीद जताई गई कि वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर बनी सहमति के आधार पर आगामी स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में इस घोषणापत्र को औपचारिक रूप से अपनाया जा सकेगा, जिससे स्वास्थ्य सहयोग का नया रोडमैप तैयार होगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए परमाणु चिकित्सा और वैक्सीन अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। सदस्य देशों ने अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के विकास में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही ब्रिक्स वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र की गतिविधियों को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई, ताकि भविष्य में उभरने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
बैठक के अवसर पर खाद्य सुरक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़ी भारत की प्रमुख उपलब्धियों और नवाचारों को भी प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से यह दिखाया गया कि डिजिटल तकनीक, एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां किस प्रकार आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। इससे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को करीब से समझने का अवसर मिला।
बैठक के अंत में सदस्य देशों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने, डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों के उपयोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए बेहतर तैयारी, रोगाणुरोधी प्रतिरोध की चुनौती से निपटने, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने पर साझा सहमति व्यक्त की। साथ ही ज्ञान साझाकरण, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत बनाने के संकल्प को दोहराया गया, ताकि भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी और सामूहिक समाधान विकसित किया जा सके।
