अमरनाथ यात्रा 2026 अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, खराब मौसम और क्षतिग्रस्त ट्रैक बना वजह

अमरनाथ यात्रा 2026 को खराब मौसम और यात्रा मार्गों के क्षतिग्रस्त होने के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। उत्तर कश्मीर के बालटाल और दक्षिण कश्मीर के पहलगाम से पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचने वाले दोनों प्रमुख रास्तों पर ट्रैक को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा रोकने का फैसला किया है।
अधिकारियों के अनुसार, बालटाल और पहलगाम दोनों बेस कैंप से आगे के रास्तों को दोबारा सुरक्षित स्थिति में लाने में काफी समय लग सकता है। खराब मौसम के बीच क्षतिग्रस्त ट्रैक पर यात्रियों की आवाजाही जोखिम भरी हो सकती है। इसी वजह से श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 को फिलहाल आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है। बेस कैंप में मौजूद श्रद्धालुओं के साथ जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास में ठहरे तीर्थयात्रियों को भी वापस अपने घर लौटने की सलाह दी गई है।
यात्रा स्थगित होने के साथ इस वर्ष के लिए अमरनाथ यात्रा का पंजीकरण भी बंद कर दिया गया है। अब नए श्रद्धालुओं को कश्मीर घाटी की ओर जाने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, भगवान शिव की पवित्र गदा मानी जाने वाली छड़ी मुबारक की पारंपरिक यात्रा जारी रहेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार छड़ी मुबारक 28 अगस्त को पारंपरिक पहलगाम मार्ग से होते हुए पवित्र अमरनाथ गुफा पहुंचेगी। इसी के साथ इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा का औपचारिक समापन माना जाएगा।
इस साल श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई को हुई थी। 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में अब तक 4.80 लाख से ज्यादा श्रद्धालु समुद्र तल से करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा स्थगित होने के बाद अब केवल उन तीर्थयात्री काफिलों को आगे बढ़ने की अनुमति होगी, जिनका उद्देश्य घाटी से श्रद्धालुओं को सुरक्षित वापस लाना है।
मौसम की स्थिति भी यात्रा के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अगले दो दिनों में जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। अमरनाथ गुफा क्षेत्र की ऊंचाई और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए खराब मौसम का बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में रास्तों पर भूस्खलन, ट्रैक को और नुकसान तथा आवाजाही में परेशानी की आशंका को देखते हुए यात्रा रोकना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है।
इस वर्ष यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी काफी सख्त रही। दोनों बेस कैंप से आगे के क्षेत्रों को नो-फ्लाई जोन घोषित किए जाने के कारण श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीएपीएफ और सेना की निगरानी में यात्रा को संचालित किया गया और सुरक्षा के व्यापक इंतजामों के चलते अब तक यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ी। हालांकि, मौसम और क्षतिग्रस्त ट्रैक ने अब यात्रा की आगे की राह रोक दी है।
