संसद में गतिरोध के बीच सरकार का बड़ा प्रस्ताव, छात्र आंदोलनों पर चर्चा के लिए तैयार; रिजिजू ने विपक्ष से की अपील

संसद के मॉनसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़ी गतिविधियों के सभी पहलुओं पर सदन में विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने विपक्ष से अपील की कि चर्चा के दौरान सदन की कार्यवाही में किसी तरह का व्यवधान न डाला जाए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात भी पूरी तरह सुनी जाए।
किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। छात्र आंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष अपनी बात रख सकता है और सरकार भी उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि जब चर्चा शुरू हो तो उसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने दिया जाए और सरकार के जवाब के दौरान नारेबाजी या हंगामा न किया जाए।
रिजिजू ने कहा कि विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बात रख रहा है। राम मंदिर से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में एसआईटी के गठन सहित कई कदम उठाए जा चुके हैं, इसलिए वह इस विषय पर फिलहाल विस्तार से टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने दोहराया कि सरकार छात्र विरोध-प्रदर्शनों और उनसे संबंधित गतिविधियों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है।
इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मौजूदा संसद सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पेश किए जाने की संभावना पर संदेह जताया। हालांकि, उन्होंने परिसीमन की जरूरत बताते हुए कहा कि इस विषय पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर व्यापक सहमति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने संसद में जारी हंगामे को खत्म कर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा करने की अपील की।
राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर अठावले ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी गोलीबारी और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं हुई हैं। उनका कहना था कि अगर विपक्ष इन घटनाओं को लेकर सवाल उठाना चाहता है तो उसे सदन में चर्चा करनी चाहिए, जहां सरकार जवाब देने के लिए तैयार है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद में किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री को अपने काम और विचारों के लिए किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।
झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन का मुद्दा भी संसद की राजनीति में चर्चा का हिस्सा बना हुआ है। केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि सरकार ने छात्रों की कई मांगें स्वीकार की हैं, लेकिन सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। उन्होंने छात्रों के विरोध को उनका मौलिक अधिकार बताया।
वहीं, भाजपा सांसद विष्णुदयाल राम ने झारखंड सरकार और कांग्रेस पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, एफसीआरए विधेयक को लेकर भी भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस के लिए सदन का सुचारु रूप से चलना जरूरी है। कुल मिलाकर, सरकार की ओर से चर्चा का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद संसद में गतिरोध खत्म करने की चुनौती बनी हुई है।
