आईसीएआर स्थापना दिवस 2026: 44 फसलों की 386 नई किस्में विकसित, कृषि अनुसंधान से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने नई दिल्ली में अपना 98वां स्थापना दिवस मनाते हुए कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार और किसान हितैषी तकनीकों के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों को साझा किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आईसीएआर ने पिछले एक वर्ष के दौरान 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें अधिकांश किस्में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं, जबकि बड़ी संख्या में जैव-सुदृढ़ीकृत किस्में भी शामिल हैं, जो पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था में किसान और वैज्ञानिक दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। किसानों के अनुभव और वैज्ञानिकों के अनुसंधान के समन्वय से ही देश की कृषि लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है। उन्होंने आईसीएआर को भारत के कृषि परिवर्तन का प्रमुख संस्थान बताते हुए कहा कि आधुनिक अनुसंधान और नई तकनीकों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाया जा रहा है।

आईसीएआर की स्थापना वर्ष 1928 में हुई थी और तभी से यह संस्था कृषि अनुसंधान, कृषि शिक्षा और तकनीकी विस्तार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देती आ रही है। पिछले 98 वर्षों में परिषद ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, नई फसल किस्मों के विकास और किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके कारण भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ कई कृषि क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुंचा है।

कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के लिए जलवायु-अनुकूल खेती को भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते मौसम और प्राकृतिक चुनौतियों को देखते हुए ऐसी फसल किस्मों और तकनीकों का विकास जरूरी है जो कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन दें। इसके साथ ही दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता, कृषि शिक्षा की गुणवत्ता, नई तकनीकों के व्यावसायीकरण और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से नवाचारों को गांव-गांव तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

समारोह के दौरान पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों में अनुसंधान और तकनीक के उपयोग को भी महत्वपूर्ण बताया गया। कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क के जरिए किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक नई तकनीकों को तेजी से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई, नैनो उर्वरक, कृत्रिम गर्भाधान, भ्रूण प्रत्यारोपण और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को कृषि विकास का आधार माना गया।

आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान फसल, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि से लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ। इसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55 हजार करोड़ रुपये रहा। उन्होंने यह भी बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों और नवाचारों का लाभ सीधे लगभग एक करोड़ किसानों तक पहुंचा, जबकि डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों तक जानकारी पहुंचाई गई।

स्थापना दिवस समारोह में 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 नई कृषि प्रौद्योगिकियों और 14 महत्वपूर्ण प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया। इनमें जलवायु-अनुकूल धान की किस्में, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन तकनीक, अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लिए स्वदेशी टीका, डिजिटल रोग एटलस और छोटे किसानों के लिए किफायती कृषि उपकरण जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसके अलावा 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे नई तकनीकों के व्यावसायीकरण और किसानों तक उनके तेजी से हस्तांतरण को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

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