जैस्मीन लेम्बोरिया ने जीता कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का गोल्ड, प्रीति पवार भी बनीं चैंपियन

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में जैस्मीन लेम्बोरिया ने नॉर्दर्न आयरलैंड की अनुभवी मुक्केबाज माइकेला वाल्श को एकतरफा अंदाज में 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह जीत न केवल उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई, बल्कि भारतीय महिला बॉक्सिंग की बढ़ती ताकत का भी शानदार उदाहरण बन गई।
खिताबी मुकाबले में जैस्मीन ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने विरोधी को कोई मौका नहीं दिया और पूरे मुकाबले में आक्रामक अंदाज बनाए रखा। सभी जजों ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें सर्वसम्मति से विजेता घोषित किया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद जैस्मीन की खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि इस बार वह पहले की तुलना में अधिक अनुभव और बेहतर तैयारी के साथ टूर्नामेंट में उतरी थीं। पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था, लेकिन इस बार उनका लक्ष्य केवल स्वर्ण पदक जीतना था और उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर उसे हासिल कर लिया।
जैस्मीन ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले कोचिंग स्टाफ ने विरोधी खिलाड़ी की शैली का गहराई से अध्ययन किया था और उसी के अनुसार रणनीति तैयार की गई। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने इस जीत के लिए कड़ी मेहनत की और आखिरकार वही रणनीति रिंग में सफल साबित हुई। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने कोच, सपोर्ट स्टाफ और परिवार को भी दिया, जिन्होंने हर कठिन दौर में उनका साथ निभाया।
हाल ही में उनकी जिंदगी पर बायोपिक बनाए जाने की चर्चा भी सामने आई, लेकिन जैस्मीन ने इस विषय पर बेहद विनम्र प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि उन्होंने कभी अपने जीवन पर फिल्म बनने के बारे में नहीं सोचा। उनके अनुसार भारत में कई ऐसे महान खिलाड़ी हैं, जिनकी प्रेरणादायक कहानियां बड़े पर्दे पर दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह खुद भी ऐसे खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ती हैं और फिलहाल उनका पूरा ध्यान केवल अपने खेल और आने वाली प्रतियोगिताओं पर है।
24 वर्षीय जैस्मीन भारतीय सेना का हिस्सा हैं और पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। इसके अलावा वह वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में भी दो स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का गोल्ड उनके शानदार करियर में एक और बड़ी उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है।
उनकी ऐतिहासिक जीत के बाद हरियाणा के भिवानी स्थित उनके घर में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्यों ने इस सफलता को वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया। उनके पिता ने कहा कि फाइनल मुकाबले के दौरान पूरे परिवार की धड़कनें तेज थीं, लेकिन उन्हें अपनी बेटी की मेहनत और आत्मविश्वास पर पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि जैस्मीन पिछले करीब दस वर्षों से लगातार बॉक्सिंग की तैयारी कर रही हैं और स्वदेश लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। वहीं उनकी मां ने भी बेटी की सफलता पर गर्व जताते हुए कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि जैस्मीन एक दिन देश के लिए स्वर्ण पदक जरूर जीतेंगी। उन्होंने बताया कि घर लौटने पर बेटी के पसंदीदा घी, दूध, दही और चूरमा से उसका स्वागत किया जाएगा।
भारत के लिए एक और खुशी की खबर महिलाओं के 54 किलोग्राम भार वर्ग से आई, जहां प्रीति पवार ने कनाडा की स्कार्लेट सवाना डेलगाडो को 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। जीत के बाद प्रीति ने कहा कि उन्हें अपनी तैयारी और प्रदर्शन पर पूरा भरोसा था। अब वह थोड़े विश्राम के बाद फिर से प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर एशियन गेम्स की तैयारियों में जुटेंगी। भारतीय महिला मुक्केबाजों के इस शानदार प्रदर्शन ने देश के खेल प्रेमियों को गर्व का एक और यादगार पल दे दिया।
