दवा कंपनियों पर सरकार की सख्ती, नए UCPMP नियम लागू, डॉक्टरों को उपहार और नकद लाभ पर रोक

केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों की विपणन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नैतिक बनाने के उद्देश्य से यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP) 2024 के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक फार्मा कंपनी के लिए एथिक्स कमेटी का गठन और एथिक्स ऑफिसर की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से दवा उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी और डॉक्टरों तथा दवा कंपनियों के बीच पेशेवर संबंध अधिक जवाबदेह बनेंगे।
नई आचार संहिता वर्ष 2015 में लागू पुराने दिशा-निर्देशों का स्थान ले चुकी है। बाद में इसमें संशोधन कर नियमों को और अधिक प्रभावी बनाया गया, ताकि दवा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सके। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवाओं का प्रचार पूरी तरह नैतिक मानकों के अनुरूप हो और किसी भी प्रकार की अनैतिक व्यावसायिक गतिविधि पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
नए नियमों के अनुसार हर दवा कंपनी को फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज एथिक्स कमेटी का गठन करना होगा, जो आचार संहिता के पालन की निगरानी करेगी। इसके साथ ही प्रत्येक कंपनी में एक एथिक्स ऑफिसर नियुक्त करना भी अनिवार्य होगा। यह अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि कंपनी की सभी विपणन गतिविधियां निर्धारित नियमों और नैतिक मानकों के अनुरूप संचालित हों। शिकायतों के समाधान और अपील के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था भी बनाई गई है, जिससे किसी भी विवाद का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा किया जा सके।
सरकार ने कंपनियों के लिए स्व-घोषणा प्रणाली भी अनिवार्य कर दी है। इसके तहत प्रत्येक कंपनी को यह प्रमाणित करना होगा कि वह निर्धारित आचार संहिता का पालन कर रही है। साथ ही कंपनियों को अपने विपणन पर होने वाले खर्च का विस्तृत विवरण भी सार्वजनिक करना होगा। विशेष रूप से सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाओं और अन्य प्रचार गतिविधियों पर किए गए खर्च का वार्षिक ब्योरा निर्धारित पोर्टल पर जमा करना होगा। इससे उद्योग में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और अनावश्यक खर्चों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।
नई आचार संहिता में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और अन्य कर्मचारियों की गतिविधियों की जिम्मेदारी भी सीधे संबंधित कंपनी पर तय की गई है। यदि कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी जवाबदेही कंपनी की भी मानी जाएगी। इसके अलावा डॉक्टरों या उनके परिवार के सदस्यों को उपहार, नकद लाभ, महंगे उपहार, यात्रा सुविधा या आतिथ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर स्पष्ट रूप से रोक लगा दी गई है। इस कदम का उद्देश्य चिकित्सा निर्णयों को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखना और मरीजों के हितों की रक्षा करना है।
सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए स्वतंत्र, यादृच्छिक तथा जोखिम-आधारित ऑडिट का भी प्रावधान किया है। इन ऑडिट के माध्यम से यह जांच की जाएगी कि कंपनियां नई आचार संहिता का सही तरीके से पालन कर रही हैं या नहीं। यदि किसी कंपनी द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से फार्मा उद्योग में पारदर्शिता और नैतिकता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही डॉक्टरों, दवा कंपनियों और मरीजों के बीच विश्वास मजबूत होगा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक जिम्मेदार और निष्पक्ष कार्य संस्कृति विकसित करने में मदद मिलेगी।
