मलेरिया वैक्सीन की कीमत में 40% की कटौती, 10 लाख अतिरिक्त बच्चों को मिलेगा टीकाकरण का लाभ

मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ वैश्विक अभियान को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत बायोटेक ने गावी और यूनिसेफ के साथ मिलकर मलेरिया वैक्सीन की कीमत कम करने के लिए समझौता किया है। इस फैसले के तहत वैक्सीन की कीमत में करीब 40 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। इससे न केवल टीकाकरण कार्यक्रमों पर होने वाला खर्च कम होगा, बल्कि अधिक बच्चों तक जीवनरक्षक सुरक्षा पहुंचाने का रास्ता भी खुलेगा। अनुमान है कि वर्ष 2027 से 2029 के बीच इस पहल से करीब 5 करोड़ डॉलर की बचत होगी। इस बचत का उपयोग लगभग 10 लाख अतिरिक्त बच्चों को मलेरिया वैक्सीन की पूरी खुराक उपलब्ध कराने में किया जा सकेगा।
मलेरिया वैक्सीन अब कम कीमत पर होगी उपलब्ध
मलेरिया वैक्सीन की कीमत घटाने का यह फैसला उन देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा है। विशेष रूप से अफ्रीकी देशों में मलेरिया के कारण बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में सीमित स्वास्थ्य बजट के कारण प्रत्येक बच्चे तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना रहता है।
कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की कमी होने से स्वास्थ्य कार्यक्रमों को कम खर्च में अधिक बच्चों का टीकाकरण करने का अवसर मिलेगा। इससे उन परिवारों और समुदायों को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है, जहां मलेरिया संक्रमण का खतरा लगातार बना रहता है।
नई व्यवस्था के तहत वैक्सीन की कीमत घटाकर 5.50 यूरो प्रति खुराक करने की योजना है। नई कीमत वर्ष 2027 की शुरुआत तक लागू होने की उम्मीद जताई गई है। इससे आने वाले वर्षों में विभिन्न देशों के टीकाकरण कार्यक्रमों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
भारत बायोटेक बना रही है मॉस्किवैक वैक्सीन
भारत बायोटेक अब मॉस्किवैक ब्रांड नाम से RTS,S/AS01 मलेरिया वैक्सीन का निर्माण कर रही है। यह वैक्सीन मलेरिया की रोकथाम के लिए विकसित किए गए महत्वपूर्ण टीकों में शामिल है। इसका मूल विकास एक अन्य दवा कंपनी ने किया था, जिसके बाद इसके उत्पादन और उपलब्धता को बढ़ाने की दिशा में काम आगे बढ़ा।
वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ाने और इसकी कीमत को किफायती बनाने के लिए विनिर्माण क्षमता का मजबूत होना बेहद जरूरी है। भारत बायोटेक ने इस दिशा में निवेश किया है, ताकि जरूरतमंद देशों तक वैक्सीन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल सके।
किसी भी टीकाकरण अभियान की सफलता केवल वैक्सीन के विकास पर निर्भर नहीं करती। इसका उत्पादन, परिवहन, भंडारण और समय पर उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना मलेरिया नियंत्रण के प्रयासों के लिए अहम कदम है।
चार खुराक से मलेरिया के मामलों में 75% तक कमी की संभावना
RTS,S/AS01 मलेरिया वैक्सीन को वर्ष 2021 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश मिली थी। इस वैक्सीन का उद्देश्य बच्चों को मलेरिया के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना और संक्रमण के कारण होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करना है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मौसमी मलेरिया के अधिक प्रसार वाले क्षेत्रों में वैक्सीन की चार खुराक का पूरा कोर्स मलेरिया के मामलों को करीब 75 प्रतिशत तक कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका प्रभाव क्षेत्र की परिस्थितियों, टीकाकरण कवरेज और अन्य स्वास्थ्य उपायों पर भी निर्भर करता है।
विशेषज्ञों के लिए मलेरिया की रोकथाम में वैक्सीन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटे बच्चों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। समय पर टीकाकरण के साथ मच्छरों से बचाव, मच्छरदानी का इस्तेमाल, साफ-सफाई और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर शीघ्र जांच भी जरूरी हैं।
भारत बायोटेक ने उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने पर दिया जोर
भारत बायोटेक के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कृष्णा एला के अनुसार, कंपनी ने मलेरिया वैक्सीन के उत्पादन की क्षमता बढ़ाने और इसकी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निवेश किया है।
उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से वैक्सीन को अधिक किफायती बनाना और अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचाना कंपनी के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। कीमत में कमी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिससे सीमित संसाधनों वाले देशों में भी टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में वैक्सीन की लागत एक बड़ा कारक होती है। जब किसी टीके की कीमत कम होती है, तो उपलब्ध बजट में अधिक खुराक खरीदी जा सकती हैं। इससे टीकाकरण का दायरा बढ़ाने और उन बच्चों तक पहुंचने में मदद मिलती है, जिन्हें पहले पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाती थी।
दुनियाभर में मलेरिया अब भी गंभीर चुनौती
मलेरिया आज भी दुनिया के कई देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। वर्ष 2024 में दुनियाभर में इस बीमारी के करीब 28.2 करोड़ मामले सामने आए, जबकि लगभग 6.1 लाख लोगों की मौत हुई। इनमें से अधिकांश मामले और मौतें अफ्रीका में दर्ज की गईं।
मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और कमजोरी इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी गंभीर हो सकती है। बच्चों के अलावा गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को भी इससे अधिक खतरा हो सकता है।
बीमारी का व्यापक प्रसार इस बात को स्पष्ट करता है कि केवल इलाज उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। संक्रमण को रोकने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने और प्रभावी रोकथाम के उपायों को लागू करने की भी जरूरत है। मलेरिया वैक्सीन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरी है।
अफ्रीका के 25 देशों में चल रहा है टीकाकरण कार्यक्रम
गावी के सहयोग से संचालित मलेरिया टीकाकरण कार्यक्रम फिलहाल अफ्रीका के 25 देशों में नियमित टीकाकरण व्यवस्था का हिस्सा है। इन कार्यक्रमों के जरिए उन क्षेत्रों में बच्चों तक वैक्सीन पहुंचाई जा रही है, जहां मलेरिया का जोखिम अधिक है।
वैक्सीन की कीमत कम होने से इन देशों को अपने सीमित स्वास्थ्य बजट का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। बचाए गए धन से अतिरिक्त खुराक की व्यवस्था की जा सकेगी और अधिक बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाने का अवसर मिलेगा।
यह पहल वैश्विक स्तर पर मलेरिया के खिलाफ चल रहे प्रयासों को गति दे सकती है। इसके साथ ही उत्पादन, वितरण और टीकाकरण की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना भी जरूरी होगा, ताकि वैक्सीन उन बच्चों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
वर्ष 2030 तक पांच करोड़ अतिरिक्त बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य
मलेरिया वैक्सीन की कीमत में कमी को वर्ष 2030 तक पांच करोड़ अतिरिक्त बच्चों के टीकाकरण के वैश्विक लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वर्ष 2027 से 2029 के बीच अनुमानित 5 करोड़ डॉलर की बचत और 10 लाख अतिरिक्त बच्चों को पूरा टीकाकरण कोर्स उपलब्ध कराने की संभावना इस पहल के महत्व को दर्शाती है।
हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किफायती वैक्सीन के साथ मजबूत स्वास्थ्य ढांचे, पर्याप्त आपूर्ति और प्रभावी टीकाकरण अभियानों की आवश्यकता होगी। भारत बायोटेक, गावी और यूनिसेफ के बीच हुआ समझौता इन प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
कुल मिलाकर, मलेरिया वैक्सीन की कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की कटौती से वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रमों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। इससे अधिक बच्चों तक सुरक्षा पहुंचाने और मलेरिया के कारण होने वाली बीमारी तथा मौतों को कम करने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
