भारत 6जी मिशन को मिली नई रफ्तार: 90 सदस्यीय गठबंधन, 6जी स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी, कोलकाता में बनेगा अत्याधुनिक टेस्टबेड

भारत तेजी से अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक की ओर कदम बढ़ा रहा है। 5जी सेवाओं के विस्तार के साथ अब देश का पूरा ध्यान 6जी तकनीक के विकास और इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने पर केंद्रित है। इसी दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारत 6जी गठबंधन को और मजबूत बनाया है। साथ ही 6जी सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया गया है, जिससे भविष्य की संचार तकनीकों के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार अनुसंधान, नवाचार, परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण में भी लगातार निवेश बढ़ा रही है ताकि भारत केवल 6जी तकनीक का उपयोगकर्ता ही नहीं बल्कि इसके विकास में अग्रणी भूमिका निभाने वाला देश बन सके।
भारत 6जी गठबंधन का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब इसमें 90 सदस्य शामिल हो चुके हैं। यह गठबंधन उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के सहयोग से संचालित एक ऐसा मंच है, जिसमें दूरसंचार सेवा प्रदाता, नेटवर्क उपकरण निर्माता, स्टार्टअप, अनुसंधान एवं विकास संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारक मिलकर काम कर रहे हैं। इस सहयोग का उद्देश्य भारत में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना, अनुसंधान को गति देना और 6जी से जुड़े वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
6जी तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर व्यवस्थित रूप से काम करने के लिए गठबंधन ने सात अलग-अलग कार्य-समूह बनाए हैं। ये समूह स्पेक्ट्रम प्रबंधन, नई तकनीकों के उपयोग, संभावित एप्लिकेशन, व्यावसायिक मॉडल, उपकरण एवं कलपुर्जों के विकास, हरित एवं टिकाऊ दूरसंचार समाधान तथा वैश्विक सहयोग और आउटरीच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य कर रहे हैं। इन समूहों का उद्देश्य केवल नई तकनीक विकसित करना ही नहीं बल्कि उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है, जिससे भारत का 6जी विजन तेजी से साकार हो सके।
6जी सेवाओं के लिए आवश्यक स्पेक्ट्रम की योजना भी तैयार कर ली गई है। स्पेक्ट्रम कार्य-समूह द्वारा तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श करने के बाद आधिकारिक स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया गया है। यह रोडमैप भविष्य में 6जी नेटवर्क के लिए आवश्यक फ्रीक्वेंसी बैंड की उपलब्धता, उपयोग और प्रबंधन की दिशा तय करेगा। इससे दूरसंचार कंपनियों, उपकरण निर्माताओं और शोध संस्थानों को आगामी तकनीकी विकास के लिए स्पष्ट दिशा मिलेगी।
देश में 6जी अनुसंधान को मजबूत करने के लिए कोलकाता में अत्याधुनिक 6जी टेराहर्ट्ज टेस्टबेड स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष की सहायता से संचालित की जा रही है और इसकी अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है। इस परियोजना का नेतृत्व सोसायटी फॉर अप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (SAMEER) करेगी, जबकि आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी पटना इसके प्रमुख साझेदार होंगे। इस पहल का उद्देश्य उच्च गति वाले संचार नेटवर्क, टेराहर्ट्ज तकनीक और भविष्य के वायरलेस समाधानों का परीक्षण करना है। परियोजना के तहत हाई डेटा रेट लाइन-ऑफ-साइट लिंक का सफल प्रदर्शन पहले ही किया जा चुका है, जिससे इस दिशा में भारत की तकनीकी क्षमता का संकेत मिलता है।
भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 6जी तकनीक के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वैश्विक दूरसंचार मानकों को तय करने वाले विभिन्न मंचों पर भारत अपनी भागीदारी लगातार बढ़ा रहा है। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के आईएमटी-2030 फ्रेमवर्क में भारत ने 6जी के लिए सर्वव्यापी कनेक्टिविटी सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इसके अलावा 3जीपीपी, आईटीयू और वनएम2एम जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठनों में भारतीय विशेषज्ञों और संस्थानों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि भविष्य के वैश्विक मानकों में भारत की भूमिका और प्रभाव मजबूत हो सके।
सरकार स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को भी इस तकनीकी परिवर्तन का अहम भागीदार बना रही है। दूरसंचार विभाग की प्रौद्योगिकी विकास एवं निवेश संवर्धन योजना के तहत स्टार्टअप और एमएसएमई को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस सहायता का उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठनों की सदस्यता, वैश्विक बैठकों में भागीदारी, भारत में तकनीकी सम्मेलनों के आयोजन, दूरसंचार उत्पादों के पायलट परीक्षण तथा विभिन्न प्रकार की मान्यता संबंधी गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। इन प्रयासों से देश में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कंपनियां भविष्य की 6जी तकनीकों के विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।
