आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत की राह, सेमीकंडक्टर से परमाणु ऊर्जा तक PM मोदी का बड़ा विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत को विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि तकनीक, ऊर्जा, विनिर्माण और रणनीतिक संसाधनों के क्षेत्र में अपनी क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों से देश के लोगों की सोच में भी बदलाव आया है।
प्रधानमंत्री ने भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता का उदाहरण सेमीकंडक्टर उद्योग के रूप में सामने रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया में सेमीकंडक्टर की चर्चा आजादी के बाद से ही होती रही, लेकिन लंबे समय तक भारत में इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर उत्पादन की शुरुआत नहीं हो सकी। आज डिजिटल युग में चिप की अहमियत हर क्षेत्र में दिखाई देती है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर मेडिकल मशीनों, वाहनों और आधुनिक तकनीक तक, लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र सेमीकंडक्टर पर निर्भर है।
प्रधानमंत्री के अनुसार भारत ने इस दिशा में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। देश में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और इनसे तैयार होने वाले उत्पादों का निर्यात भी शुरू होने की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले सात से आठ वर्षों में देश में कई और सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित होने की उम्मीद है। इससे भारत की तकनीकी क्षमता बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भी देश की भूमिका मजबूत हो सकती है।
पीएम मोदी ने महत्वपूर्ण खनिजों को भी भारत की आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक की पूरी व्यवस्था कई महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैटरी, ऊर्जा तकनीक और कई उन्नत उद्योगों के लिए इन संसाधनों की आवश्यकता होती है। भारत अपनी जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन और महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दूसरे देशों के साथ भी समझौते कर रहा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और भविष्य में किसी बाहरी निर्भरता को कम करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई देश अब इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग को महत्व दे रहे हैं।
तकनीकी विकास के साथ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत पर भी प्रधानमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े डाटा सेंटर के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा को भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि देश ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की दिशा में भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पीएम मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर से लेकर महत्वपूर्ण खनिज और परमाणु ऊर्जा तक आत्मनिर्भरता का यह पूरा प्रयास भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के बड़े लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।
