व्यापारियों के लिए री केवाईसी की डेडलाइन करीब, 15 सितंबर के बाद रुक सकती है डिजिटल पेमेंट सेवा

डिजिटल माध्यम से लेनदेन करने वाले देश के छोटे और बड़े कारोबारियों के लिए आगामी दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए तय की गई री-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने की अंतिम समय सीमा 15 सितंबर बेहद नजदीक आ गई है। नए निर्देशों के अनुसार सभी व्यापारियों के लिए अपना पूर्ण सत्यापन कराना आवश्यक कर दिया गया है ताकि उनकी डिजिटल भुगतान सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहें। अनुमान बताते हैं कि अब भी एक बड़ा वर्ग इस पूरी प्रक्रिया को पूरा नहीं कर सका है। कड़े नियमों और विस्तृत कागजी औपचारिकताओं के कारण दुकानदारों और वित्तीय कंपनियों दोनों के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
सत्यापन की इस नई व्यवस्था में कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अब केवल ऑनलाइन माध्यम से कागजात जमा कर देना ही काफी नहीं होगा। कंपनियों को कारोबार की वास्तविक प्रकृति और उसके मालिकाना हक की गहराई से जांच करनी होगी। जो नए कारोबारी चालू वर्ष की शुरुआत में जुड़े थे, उनका सत्यापन पहले ही किया जा चुका है। अब पुराने व्यापारियों के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की गई है। यदि इस समय सीमा तक प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो संबंधित मर्चेंट की ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करने की सुविधा और यूपीआई सेवाएं प्रभावित या अस्थायी रूप से निलंबित की जा सकती हैं।
सबसे बड़ी चुनौती ऑन-ग्राउंड फिजिकल वेरिफिकेशन को लेकर आ रही है। निर्देशों के तहत पेमेंट कंपनियों के प्रतिनिधियों को कारोबारी के व्यावसायिक स्थल पर जाकर प्रत्यक्ष जांच करनी होगी। थर्ड पार्टी एजेंसियों के बजाय कंपनियों को अपने ही कर्मचारियों के जरिए यह भौतिक सत्यापन कराना पड़ रहा है, जिससे उनका परिचालन खर्च और समय दोनों बढ़ गए हैं।
इस पूरी कवायद का सबसे ज्यादा असर छोटे, असंगठित और व्यक्तिगत स्तर पर दुकान चलाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। अक्सर छोटे दुकानदारों के पास कॉरपोरेट स्तर के आधिकारिक दस्तावेज, टैक्स रिटर्न या व्यावसायिक पते का औपचारिक प्रमाण मौजूद नहीं होता है। जब उनसे वास्तविक मालिकाना हक से जुड़े जटिल कागजात मांगे जाते हैं, तो उन्हें प्रक्रिया पूरी करने में भारी परेशानी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे कारोबारियों को इस डिजिटल तंत्र में बनाए रखने के लिए नियमों को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए।
डिजिटल सत्यापन की इस प्रक्रिया के साथ डेटा सुरक्षा का पहलू भी जुड़ा हुआ है। डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 के प्रावधानों के अनुसार व्यापारियों की व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह सुरक्षित रखना एग्रीगेटर कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी है। इसके अलावा कारोबारी अपनी प्रक्रिया समय पर पूरी कर सकें, इसके लिए कुछ आवश्यक कागजात तैयार रखने जरूरी हैं। इनमें पैन कार्ड, आधार कार्ड या पासपोर्ट पहचान के रूप में काम आते हैं। वहीं व्यवसाय के प्रमाण के लिए जीएसटी पंजीकरण या दुकान लाइसेंस और पते के प्रमाण के लिए बिजली बिल या बैंक विवरण पत्र की आवश्यकता होती है।
