बिंदुओं के साझा घोषणापत्र में परमाणु अप्रसार का संकल्प और पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 140 बिंदुओं का ऐतिहासिक साझा बयान जारी

नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक शांति, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर एक व्यापक सहमति बनी है। सम्मेलन के पहले दिन बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 140 बिंदुओं का एक विस्तृत साझा बयान जारी किया गया। इसमें सदस्य देशों ने रणनीतिक साझेदारी, बहुपक्षीय सुधारों और एक न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। इस वर्ष का सम्मेलन लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के मूल मंत्र पर केंद्रित रहा।

पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा और आतंकवाद पर सख्त रुख

साझा घोषणापत्र के 40वें और 41वें बिंदु भारत के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रहे। ब्रिक्स देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए वीभत्स आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। घोषणापत्र में स्पष्ट किया गया कि आतंकवाद का कोई भी रूप, उसकी प्रेरणा या स्थान चाहे जो भी हो, वह पूरी तरह से आपराधिक और अनुचित है। सदस्य देशों ने टेरर फंडिंग, आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही और उनके सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने के लिए कठोर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही आतंकवाद से निपटने में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को खारिज करने का आह्वान किया गया।

ग्लोबल न्यूक्लियर थ्रेट और अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

दुनिया भर में बढ़ते परमाणु जोखिमों और संघर्षों पर चिंता व्यक्त करते हुए साझा बयान में निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की वकालत की गई। ब्रिक्स नेताओं ने परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों की स्थापना का समर्थन किया और कहा कि ऐसे क्षेत्र वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक हैं। विशेष रूप से मध्य पूर्व को परमाणु और सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने की प्रक्रिया को तेज करने पर सहमति व्यक्त की गई, ताकि अंतरराष्ट्रीय शांति को सुनिश्चित किया जा सके।

तीन प्रमुख स्तंभों के जरिए विस्तारित ब्रिक्स का सुदृढ़ीकरण

संगठन के दो दशकों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए, ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों के तहत सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया गया। इनमें राजनीतिक व सुरक्षा, आर्थिक व वित्तीय, तथा सांस्कृतिक व जन-से-जन संबंध शामिल हैं। नेताओं ने संप्रभु समानता, सर्वसम्मति और समावेशिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए विकासशील देशों और उभरते बाजारों के हितों की रक्षा करने का संकल्प लिया।

युवाओं में कट्टरपंथ की रोकथाम और साझेदार देशों की भूमिका

कट्टरपंथ और उग्रवाद से युवाओं को बचाने के लिए ब्रिक्स देशों ने आपस में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहमति जताई। इसके साथ ही, ब्रिक्स प्लस संवाद के माध्यम से नए साझेदार देशों की भागीदारी का स्वागत किया गया। यह पहल वैश्विक दक्षिण के देशों को एकजुट करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रतिनिधित्व को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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