7 घंटे सोने के बाद भी रहती है थकान, तो सावधान! वजह हो सकती है

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अक्सर लोग रात में सात से आठ घंटे की पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही थकान और सुस्ती महसूस करते हैं। आमतौर पर इस समस्या को अत्यधिक काम के तनाव, मानसिक चिंता या बिगड़ी हुई जीवनशैली का परिणाम मान लिया जाता है। हालांकि हर बार वजह सिर्फ तनाव या लाइफस्टाइल नहीं होती। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में इंसान के मुंह और जबड़े की शारीरिक बनावट भी नींद की गुणवत्ता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। जबड़े का छोटा होना या उसका पीछे की तरफ होना सांस की नली में रुकावट पैदा कर सकता है।

जबड़े की बनावट और नींद की समस्या का सीधा संबंध

रात को सोते समय इंसान के शरीर की तमाम मांसपेशियां पूरी तरह रिलैक्स यानी शिथिल अवस्था में आ जाती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान जीभ और गले के आसपास मौजूद कोमल ऊतक पीछे की तरफ खिसकने लगते हैं। यदि किसी व्यक्ति का निचला जबड़ा सामान्य से छोटा है या पीछे की ओर धंसा हुआ है, तो मुंह के भीतर जीभ को सही जगह नहीं मिल पाती। इसके चलते सांस लेने वाली नली पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और हवा का मार्ग संकरा हो जाता है। यह स्थिति ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का मुख्य कारण बनती है, जिसमें सोते समय बार-बार सांस में रुकावट आती है।

भरपूर नींद लेने के बाद भी क्यों बनी रहती है थकावट

स्लीप एपनिया से पीड़ित हर व्यक्ति में तेज खर्राटे लेने या सांस अचानक रुक जाने जैसे स्पष्ट लक्षण नजर आएं, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार इस बीमारी का एकमात्र संकेत दिनभर महसूस होने वाली लगातार थकान ही होता है। व्यक्ति आठ घंटे तक बिस्तर पर सोता तो है, लेकिन मस्तिष्क को ऑक्सीजन की सही मात्रा न मिलने के कारण वह सुबह तरोताजा महसूस नहीं कर पाता। इसके अलावा सुबह उठते ही सिर में भारीपन, दिन के समय अचानक तेज नींद आना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन और किसी काम में मन न लगना भी इसके मुख्य लक्षण हैं।

समस्या को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

रात में बार-बार सांस लेने के रास्ते में बाधा आने से नींद की निरंतरता टूटती रहती है। भले ही व्यक्ति को रात में बार-बार जागने का अहसास न हो, लेकिन उसका शरीर और दिमाग पूरी तरह विश्राम की स्थिति में नहीं पहुंच पाता। यही कारण है कि पर्याप्त समय तक सोने के बावजूद शरीर दिनभर सुस्त बना रहता है। बढ़ता वजन, ढलती उम्र और गलत दिनचर्या इस जोखिम को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। यदि खर्राटों और सुबह की थकान की यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

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