पीएम मोदी बोले: प्राचीन विचारों और आधुनिक विजन से भारत कर रहा जलवायु परिवर्तन का मुकाबला

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पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पर्यावरण विजन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं और विचारों को आधुनिक दृष्टि के साथ जोड़कर पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रहा है। बीते 12 वर्षों में देश ने पर्यावरण से जुड़े हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हासिल की है।

नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान

सरकार का सबसे बड़ा ध्यान नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर रहा है। अक्षय ऊर्जा के स्रोतों को बढ़ावा देने से न केवल देश की पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल करने में भी बड़ी मदद मिली है। ऊर्जा क्षेत्र में हुए इन सुधारों से भारत हरित विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सदियों पुराना भारत का मार्गदर्शन

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण को लेकर भारत ने सदियों तक दुनिया को सही दिशा दिखाई है। देश का सांस्कृतिक इतिहास हमेशा से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की सीख देता रहा है। भारत अपने इन्हीं समृद्ध अनुभवों के आधार पर आज की आधुनिक जलवायु चुनौतियों के लिए नए और व्यावहारिक समाधान पेश कर रहा है।

वैश्विक मंचों पर भारत का रुख

भारत न केवल अपने स्तर पर ठोस कदम उठा रहा है, बल्कि पूरी दुनिया को एक साथ मिलकर प्रयास करने का आह्वान भी कर रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी द्वारा आयोजित यह सम्मेलन इसी वैश्विक मिशन को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। सम्मेलन में पहुंचे विशेषज्ञों ने भी भारत की इस अगुवाई की सराहना की है।

कार्बन उत्सर्जन पर विकासशील देशों का पक्ष

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी के मुद्दे पर भी सीधा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अक्सर जलवायु परिवर्तन और उत्सर्जन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाल दी जाती है। यह एक ऐसा नैरेटिव है जो ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाता है।

ऐतिहासिक सच्चाई और भारत का आंकड़ा

वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। आज भी भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन दुनिया के औसत से आधे से भी कम है। भारत अपनी विशाल आबादी के बावजूद पर्यावरण पर कम से कम दबाव डालने वाली जीवनशैली का पालन करता है।

विकसित देशों की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित देशों में भारत की तुलना में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन छह गुना तक अधिक है। भारत इस सच्चाई को हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी मजबूती के साथ रखता है। उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए विकसित देशों को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी।

मानवता के सामूहिक प्रयासों का आह्वान

पर्यावरण सुरक्षा केवल एक देश की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसके लिए दुनिया के सभी राष्ट्रों को एक मंच पर आना होगा। भारत अपनी तरफ से वैश्विक पहलों का नेतृत्व कर रहा है और दुनिया के अन्य देशों को भी इस अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा है।

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