चिकित्सा क्षेत्र में नई क्रांति, सुपर माइक्रोसर्जरी से होगा फाइलेरिया और कैंसर से होने वाली सूजन का सटीक इलाज

राजधानी के अग्रणी प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओर से सुपर माइक्रोसर्जरी तकनीक पर दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफ़ल आयोजन किया गया। इस आयोजन में बेहद बारीक रक्त वाहिकाओं और लसीका तंत्र के इलाज से जुड़ी आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। चिकित्सा जगत के इस महत्वपूर्ण कदम से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहतर और सटीक इलाज के नए रास्ते खुले हैं।
सुपर माइक्रोसर्जरी और सामान्य तकनीक में अंतर
सुपर माइक्रोसर्जरी को पारंपरिक माइक्रोसर्जरी की तुलना में काफी अधिक उन्नत माना जाता है। सामान्य माइक्रोसर्जरी में आमतौर पर कुछ मिलीमीटर चौड़ी रक्त वाहिकाओं का उपचार किया जाता है। इसके विपरीत सुपर माइक्रोसर्जरी तकनीक में 0.8 मिलीमीटर से भी कम, लगभग 0.3 से 0.5 मिलीमीटर जितनी पतली वाहिकाओं को कुशलतापूर्वक जोड़ा जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में इंसानी बाल से भी कई गुना ज्यादा बारीक टांकों और उच्च क्षमता वाले सर्जिकल माइक्रोस्कोप का उपयोग किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहभागिता
इस विशेष कार्यशाला में दक्षिण कोरिया के प्रसिद्ध सुपर माइक्रोसर्जरी एवं लसीका पुनर्निर्माण विशेषज्ञ प्रोफेसर जॉन पियो हांग ने मुख्य मार्गदर्शक के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ-साथ देश के विभिन्न प्रतिष्ठित अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों और विभागाध्यक्षों ने भी इस कार्यशाला में सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी विशेषज्ञों ने मिलकर आधुनिक सर्जरी की बारीकियों को साझा किया।
जटिल बीमारियों पर सफल सर्जिकल प्रदर्शन
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों की टीम द्वारा कुल छह जटिल सर्जरी सफलता के साथ पूरी की गईं। इनमें फाइलेरिया, स्तन कैंसर के इलाज के बाद होने वाली हाथों की सूजन और लंबे समय से ठीक न होने वाले डायबिटिक फुट अल्सर जैसी बीमारियां शामिल रहीं। डायबिटिक फुट के एक बेहद गंभीर मामले में बहुत पतले त्वचा फ्लैप का इस्तेमाल करके पुनर्निर्माण तकनीक का प्रदर्शन किया गया।
आधुनिक इमेजिंग और मैपिंग तकनीकों का उपयोग
सर्जरी के अलावा इस कार्यक्रम में इंडोसाइनिन ग्रीन इन्फ्रारेड मैपिंग और हाई-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड मैपिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को भी प्रदर्शित किया गया। इन मैपिंग तकनीकों की मदद से डॉक्टरों के लिए त्वचा के नीचे की बेहद बारीक वाहिकाओं को पहचानना और सटीक स्थान पर सर्जरी करना काफी आसान हो जाता है। इससे ऑपरेशन के दौरान जोखिम काफी हद तक घट जाता है।
विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में नई संभावनाएं
हर साल सैकड़ों माइक्रोसर्जरी प्रक्रियाएं पूरी करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों में इस नई तकनीक के आ जाने से कैंसर के बाद होने वाले लिम्फोएडेमा और डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में क्रांतिकारी सुधार आने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, आने वाले समय में डिमेंशिया और माइग्रेन जैसी जटिल स्थितियों के इलाज के लिए भी इस सर्जरी तकनीक के नए उपयोगों पर लगातार शोध जारी है।
